नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश के मौजूदा प्रधानमंत्री तारिक रहमान और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कई तीखे सवाल दागे हैं। भारतीय मीडिया को दिए गए एक इंटरव्यू में शेख हसीना ने अपने प्रत्यर्पण (Extradition) को भारत-बांग्लादेश संबंधों और तारिक रहमान की नई दिल्ली यात्रा से जोड़ने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें खुद नहीं पता था कि वह इतनी ताकतवर हैं कि उनके एक बयान से दो देशों के कूटनीतिक संबंध डगमगा जाएंगे।
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि तारिक रहमान जब 2007 में बांग्लादेश छोड़कर ब्रिटेन गए थे, तब उन्होंने स्टांप पेपर पर हलफनामा देकर राजनीति न करने का वादा किया था। इसके बावजूद उन्होंने लंदन में बैठकर अपनी पार्टी बीएनपी का संचालन किया और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रैलियों और बैठकों को संबोधित किया। हसीना ने सवाल किया, "क्या मैंने कभी ब्रिटिश सरकार से यह कहा कि मेरे देश के एक भगोड़े को इस तरह की बैठकें करने से रोका जाए? मैंने कभी ऐसी आपत्ति दर्ज नहीं कराई। तो आज जब मैं एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रखती हूं, तो इससे दो देशों के संबंध कैसे प्रभावित हो सकते हैं?"
अपने प्रत्यर्पण विवाद पर खुलकर बोलते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि बीएनपी सरकार प्रत्यर्पण संधि की आड़ में राजनीति कर रही है, जबकि वह खुद स्वेच्छा से बांग्लादेश वापस लौटना चाहती हैं। उन्होंने कहा, "क्या मैं जीवन भर विदेश में रहूंगी? मैं अपने देश और अपने लोगों के पास वापस लौटूंगी। मुझे समझ नहीं आता कि तारिक रहमान को मेरे लौटने से इतनी घबराहट और आपत्ति क्यों है।" उन्होंने संकेत दिया कि बांग्लादेश में चल रहे मौजूदा राजनीतिक और आर्थिक संकट को देखते हुए वह दिसंबर तक अपने वतन वापस जाने का फैसला कर चुकी हैं।
शेख हसीना ने बांग्लादेश की गंभीर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए मौजूदा सरकार की प्राथमिकताओं पर भी उंगली उठाई। उन्होंने कहा कि देश इस समय गंभीर बिजली कटौती, गैस किल्लत और आवश्यक वस्तुओं की महंगाई से जूझ रहा है। गैस संकट के कारण छह में से पांच खाद कारखाने बंद पड़े हैं। ऐसे नाजुक दौर में जनता की बुनियादी समस्याओं को सुलझाने के बजाय सरकार चीन के साथ 2.3 अरब डॉलर की लड़ाकू विमान (फाइटर जेट्स) डील करने में जुटी है, जो सीधे तौर पर जनता के पैसे की बर्बादी है।