नई दिल्ली: पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लेकर एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है. पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी FIA ने अपनी नई रेड बुक में मसूद अजहर को भगोड़ा घोषित करते हुए उसके सिर पर घोषित इनाम की राशि बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दी है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब मसूद अजहर लंबे समय से पाकिस्तान में छिपकर आतंकी नेटवर्क संचालित करने के आरोपों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निशाने पर है.
FIA की रेड बुक में उन लोगों और आतंकियों का रिकॉर्ड शामिल किया जाता है, जिन्हें पाकिस्तान की जांच एजेंसियां वांछित या भगोड़ा मानती हैं. नई सूची में मसूद अजहर का नाम दोबारा शामिल होना इस बात का संकेत है कि पाकिस्तानी एजेंसियां कागजों पर उसे अब भी फरार घोषित कर रही हैं. हालांकि, अजहर की वास्तविक स्थिति और वह पाकिस्तान में कहां मौजूद है, इसे लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं.
मसूद अजहर का नाम भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों और साजिशों से जुड़ा रहा है. जैश-ए-मोहम्मद का गठन करने वाले अजहर को भारत ने लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई के केंद्र में रखा है. 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 के अपहरण के बाद यात्रियों की रिहाई के बदले भारत को उसे जेल से छोड़ना पड़ा था, इसके बाद उसने जैश-ए-मोहम्मद के जरिए भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाया.
मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2019 में वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था. इसके बावजूद उसके पाकिस्तान में खुले तौर पर मौजूद रहने को लेकर भारत लगातार सवाल उठाता रहा है. अब FIA की रेड बुक में उस पर 70 लाख रुपये का इनाम घोषित किए जाने से पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी दावों पर फिर चर्चा तेज हो गई है.
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर पाकिस्तान की एजेंसियां अजहर को भगोड़ा मानती हैं, तो इतने वर्षों बाद भी उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकी.