पालघर: महाराष्ट्र में निकाय चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा. पालघर जिले के डहाणु में आयोजित एक कार्यक्रम में काशीनाथ चौधरी को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता दिलाई गई. चौधरी पर अप्रैल 2020 के पालघर साधु मॉब लिंचिंग में संलिप्तता का आरोप है. जैसे ही उनकी पार्टी जॉइनिंग की तस्वीरें वायरल हुईं, सोशल मीडिया पर बवाल मच गया.
विपक्ष ने भाजपा को घेर लिया और 24 घंटे के अंदर ही पार्टी ने यू-टर्न लेते हुए चौधरी की सदस्यता निलंबित कर दी. मामला गरमाता देख प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने स्पष्ट किया कि चौधरी का नाम किसी FIR या चार्जशीट में नहीं है, लेकिन घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए उनका प्रवेश अस्थायी रूप से रोक दिया गया है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी सफाई देनी पड़ी कि स्थानीय इकाई का फैसला था, पार्टी स्तर पर कोई मंजूरी नहीं ली गई थी. एनसीपी (शरद पवार गुट) के रोहित पवार ने तंज कसा. उन्होंने कहा कि जिन लोगों को भाजपा ने 2020 में साधु हत्याकांड का मास्टरमाइंड बताया था, आज उसी को लाल गुलाब देकर स्वागत किया. जब चारों तरफ थू-थू हुई तो 24 घंटे में ही क्लीन चिट वापस ले ली. लगता है प्रदेश अध्यक्ष की जांच एजेंसी गृह विभाग से भी तेज काम करती है.
कांग्रेस ने भी हमला बोला कि भाजपा की दोहरी नीति फिर बेनकाब हो गई. पहले साधुओं की हत्या पर महाविकास आघाड़ी सरकार को कोसा था, अब उसी मामले के आरोपी को गले लगा रही है. दरअसल, 16 अप्रैल 2020 की रात लॉकडाउन के दौरान कांदिवली (मुंबई) से सूरत अपने गुरु के अंतिम संस्कार में जा रहे दो साधु– चिकने महाराज कल्पवृक्षगिरी (70), सुशीलगिरी महाराज (35) और उनके ड्राइवर निलेश तेलगाड़े (30) को गडचिंचले गांव के पास बच्चा चोर समझकर भीड़ ने घेर लिया.
पुलिस की मौजूदगी में ही लाठी-डंडों और पत्थरों से तीनों को पीट-पीटकर मार डाला गया. घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पूरे देश में आक्रोश फैला था. उस वक्त काशीनाथ चौधरी अविभाजित एनसीपी में थे और एमवीए सरकार में सत्ता पक्ष का हिस्सा थे. अब निकाय चुनाव से ठीक पहले उनके भाजपा में शामिल होने और फिर तुरंत बाहर निकाले जाने से सियासी गलियारों में खूब चर्चा है. भाजपा इसे स्थानीय स्तर की गलती बता रही है, तो विपक्ष इसे सत्ता के लिए नैतिकता की हत्या करार दे रहा है.