नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश भाजपा में ब्राह्मण विधायकों के बीच पैदा हुई बेचैनी ने पार्टी के अंदर खासी सरगर्मी बढ़ा दी है. शीर्ष नेतृत्व ने इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाए हैं. हाल ही में लखनऊ में हुई एक बैठक के बाद कुछ ब्राह्मण विधायकों की नाराजगी सामने आई, जिसे लेकर संगठन और सरकार के स्तर पर चिंता जताई गई. पार्टी हाईकमान ने हालात को संभालने की कमान वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी को सौंपी है. उनकी जिम्मेदारी है कि वे इन विधायकों से संपर्क करें, उनकी शिकायतें सुनें और माहौल को शांत करें.
इस क्रम में रमापति राम त्रिपाठी ने देवरिया से भाजपा विधायक डॉ. शलभमणि त्रिपाठी से मुलाकात की. डॉ. शलभमणि उन विधायकों में शामिल थे जो 23 दिसंबर की उस बैठक में मौजूद थे. इस मुलाकात को समझौते की दिशा में एक प्रयास माना जा रहा है. पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि आंतरिक मतभेदों को जल्दी सुलझाकर एकजुटता बनाए रखी जाए.
उसी दिन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी बैठक की. सूत्रों का कहना है कि इस चर्चा में ब्राह्मण विधायकों के मुद्दे पर फोकस रहा. पंकज चौधरी ने विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसी अनौपचारिक बैठकों का सिलसिला आगे नहीं चलना चाहिए, अन्यथा पार्टी अनुशासन के तहत कार्रवाई हो सकती है.
रमापति राम त्रिपाठी ने कई विधायकों से टेलीफोन पर भी बातचीत की है. उन्होंने संयम बरतने की सलाह दी और आश्वासन दिया कि उनकी बातों को पार्टी के उचित मंच पर रखा जाएगा. उनका कहना था कि नए प्रदेश अध्यक्ष के कार्यकाल में बिना समन्वय के इस तरह की गतिविधियां उचित नहीं हैं.
पूर्वांचल में रमापति राम त्रिपाठी को भाजपा का प्रमुख ब्राह्मण नेता माना जाता है और वे पंकज चौधरी के निकट माने जाते हैं. यही कारण है कि उन्हें यह महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी गई. वहीं, देवरिया के विधायक डॉ. शलभमणि त्रिपाठी के यहां अगली बैठक की जो अफवाहें उड़ीं, उन्हें भी खारिज कर दिया गया है. कोई ऐसा आयोजन निर्धारित नहीं है.