नई दिल्ली/बिहार: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले और विवादित वक्फ कानून पास होने के बाद राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) ने एनडीए से अपना नाता तोड़ लिया है. रालोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने NDA से अलग होने का ऐलान भी कर दिया है. उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी का अब NDA का हिस्सा नहीं रहेगी. पशुपति पारस इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना भी साधा और उन्हें दलित विरोधी करार दिया. उन्होंने ये बातें पटना के बापू सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में कही.
पारस ने कहा कि आज से हम एनडीए के साथ नहीं रहेंगे. उन्होंने कहा कि 2014 में एनडीए के साथ आए और तभी से वफादार सहयोगी के रूप में काम किया, लेकिन लोकसभा चुनाव में हमारी पार्टी को दलित होने का एहसास कराया गया. महागठबंधन में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि वहां हमे उचित सम्मान मिलेगा तो जरूर शामिल होने के बार में सोचेंगे. साथ ही पशुपति पारस ने स्वर्गीय रामविलास पासवान को भारत रत्न देने की भी मांग की.
उन्होंने अपने आगे के कार्यक्रमों की भी जानकारी दी. पारस ने कहा कि पार्टी सभी 243 सीटों पर जल्द सदस्यता अभियान चलाएगी. इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ही सरकारें दलित विरोधी हैं और केंद्र सरकार ने तो अंबेडकर साहब का अपमान किया किया है. पशुपति पारस ने कहा कि मैं यह घोषणा करने आया हूं कि आज से हमारा एनडीए के साथ कोई संबंध है.
उन्होंने कहा कि आज से ही हमरे कार्यकर्ता 243 सीटों पर गांव-गांव में जाएंगे और संगठन को मजबूत करने पर जोर देंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि जो उनकी पार्टी को उचित सम्मान देगा, उसका समर्थन करेंगे. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया फिलहाल पार्टी सभी सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के लिए कार्य करेगी. अगर गठबंधन पर बांत होगी तो, पार्टी के सभी नेता मिलकर बैठकर चर्चा करेंगे और निर्णय लेंगे.