नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग में शक्ति के केंद्रीकरण के आरोपों वाला मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. एक याचिका में कहा गया है कि बिना दो चुनाव आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी की सहमति के कई अहम फैसले लिए गए हैं. याचिकाकर्ता ने इन फैसलों को रद्द करने के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी या न्यायिक जांच कराने की मांग की है.
याचिका में एसआईआर प्रक्रिया में बदलाव, फॉर्म-6 में संशोधन, ईसीआईनेट के जरिए डेटा पर नियंत्रण और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स पर लगाए गए प्रतिबंधों का जिक्र है. इसमें बंगाल में 16.10 लाख अपील फाइल करने के मामले को भी शामिल किया गया है. याचिकाकर्ता का दावा है कि पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार दोनों आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई.
याचिका में मांग की गई है कि बिना दोनों आयुक्तों की सहमति के लिए गए सभी फैसले रद्द किए जाएं, फॉर्म-6 को पहले की तरह लागू किया जाए और ईसीआईनेट के तहत एकत्र डेटा की फॉरेंसिक जांच करवाई जाए. चुनाव आयोग ने पहले इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा था कि मतभेद अंदरूनी मामला और कामकाज का हिस्सा हैं. अंत में जो फैसले लिए जाते हैं, वे सहमति से ही होते हैं.
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर इस्तीफा नहीं दिया गया तो 2 अक्टूबर से देशभर में प्रदर्शन शुरू हो जाएंगे. कांग्रेस पहले से ही चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है तथा कई शहरों में प्रदर्शन कर चुकी है.
भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर चुनावी पराजयों से हताश होकर संवैधानिक संस्थानों को बदनाम करने का आरोप लगाया है. इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, असम, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों ने संवाददाता सम्मेलन कर भाजपा का पक्ष रखा.