नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के संभल में पिछले साल नवंबर में भड़की हिंसा के सिलसिले में शाही जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जफर अली को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया है. संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने पुष्टि की कि है कि जफर अली को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन उन्होंने इस बारे में और कुछ नहीं बताया. जफर अली के बड़े भाई ताहिर अली ने आरोप लगाया कि पुलिस सोमवार को न्यायिक पैनल के समक्ष उनकी गवाही दर्ज होने से पहले ही उनके भाई को "जानबूझकर" जेल भेज रही है. हिंसा की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने पैनल का गठन किया है.
जफर अली के भाई ने पत्रकारों को बताया, "करीब 11.15 बजे एक इंस्पेक्टर और जांच अधिकारी हमारे घर आए और कहा कि सीओ (सर्किल ऑफिसर) कुलदीप सिंह बात करना चाहते हैं. उन्होंने कल रात भी हमसे बात की थी. जफर को कल आयोग के सामने गवाही देनी थी और इसीलिए वे जानबूझकर उसे जेल भेज रहे हैं." उन्होंने आगे कहा, "जफर ने पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना बयान दे दिया है और वह इससे पीछे नहीं हटेगा. उसने साफ तौर पर कहा था कि पुलिस ने गोलियां चलाईं और जो लोग मारे गए, वे पुलिस की गोलियों से मारे गए."
जब पूछा गया कि पुलिस द्वारा ले जाए जाने से पहले जफर अली से उसकी क्या बातचीत हुई, तो ताहिर अली ने कहा, "उसने मुझसे कहा, 'कोई बात नहीं, मैं जेल जाने को तैयार हूं. मैं सच्चाई से पीछे नहीं हटूंगा'." वहीं जफर की गिरफ्तारी के बाद इलाके में एक बार फिर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है. गिरफ्तारी के समय लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारे भी लगाए और विरोध जताया.
उन्होंने संभल प्रशासन पर जानबूझकर लोगों में अशांति फैलाने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया, "अधिकारी नहीं चाहते कि तनाव कम हो. हम शांति बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यहां के सभी पुलिस अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी और भी विवाद को बढ़ावा दे रहे हैं." इससे पहले दिन में संभल पुलिस की विशेष जांच टीम ने जफर अली को हिरासत में लेकर उसका बयान दर्ज किया था.
मुगलकालीन मस्जिद विवाद की वजह?
बता दें कि मुगलकालीन मस्जिद एक महत्वपूर्ण विवाद के केंद्र में रही है, क्योंकि दावा किया गया है कि इसे एक प्राचीन हिंदू मंदिर के स्थल पर बनाया गया था. मस्जिद के न्यायालय द्वारा आदेशित सर्वेक्षण के विरोध में हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए, जिनमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. 24 नवंबर की घटना के कारण व्यापक अशांति फैल गई, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के साथ झड़प की, पत्थर फेंके और वाहनों में आग लगा दी. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. कुल मिलाकर, एसआईटी ने इस हिंसा से संबंधित बारह मामलों में से छह में 4,000 से अधिक पृष्ठों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 159 व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है.
अब तक क्या-क्या हुआ, पूरी जानकारी
चार्जशीट में यह भी खुलासा हुआ है कि घटनास्थल से बरामद हथियार यूनाइटेड किंगडम और जर्मनी सहित देशों में निर्मित किए गए थे. रिपोर्ट बताती है कि जफर अली सर्वेक्षण के बारे में जानकारी प्राप्त करने वाले पहले लोगों में से थे, जिसके कारण विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और स्थानीय लोगों के मस्जिद के बाहर इकट्ठा होने के कारण हिंसा भड़क गई. हिंसा की शुरूआती घटना के बाद से संभल अपेक्षाकृत शांत रहा है और आगे कोई घटना नहीं हुई.
आगामी त्योहारों को देखते हुए स्थानीय अधिकारियों ने भारी पुलिस बल तैनात किया है और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फ्लैग मार्च किया है. इस दौरान लोगों ने मस्जिद में जुमे की नमाज के साथ-साथ शांतिपूर्ण तरीके से होली मनाई. होली से पहले जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुनिश्चित करने के लिए सर्किल ऑफिसर अनुज चौधरी ने अन्य पुलिसकर्मियों के साथ फ्लैग मार्च किया था.
पुलिस के अलावा अर्धसैनिक बलों ने भी संभल में फ्लैग मार्च किया, जबकि प्रशासन जिले में स्थिति की उचित निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है. जामा मस्जिद की नियमित रूप से की जाने वाली सफेदी का काम भी कोर्ट के आदेश के बाद किया गया.