नई दिल्ली: जन सुराज के संस्थापक और पूर्व चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने रविवार को बिहार विधानसभा चुनावों में अपनी नवगठित राजनीतिक पार्टी के पूरी तरह सफाया होने के बाद चुप्पी तोड़ी. उन्होंने दावा किया कि चुनाव में धंधली हुई थी, हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि इस चरण में उनके पास आरोप की पुष्टि करने के लिए कोई सबूत नहीं है.
किशोर की पार्टी ने पहली बार राज्यव्यापी चुनाव लड़ा था. उन्होंने कहा कि हार 'कुचल देने वाली' थी, लेकिन जोर देकर कहा कि उनकी जमीन पर चुनावी मुहिम में काफी जोर था. उन्होंने दावा किया कि वोटिंग ट्रेंड उनके टीम द्वारा महीनों लंबी जन सुराज यात्रा के दौरान इकट्ठा किए गए फीडबैक से मेल नहीं खाते, और कहा कि उन्हें लगता है कि 'कुछ गड़बड़ हुई'.
प्रशांत किशोर ने कहा, "कुछ अजेय शक्तियां खेल में थीं. ऐसी पार्टियां जिन्हें लोग मुश्किल से जानते थे, लाखों वोट पा गईं. कुछ लोग मुझसे कह रहे हैं कि आवाज उठाओ और कहो कि ईवीएम में हेरफेर हुआ. यह वो चीज है जो लोग हारने के बाद आरोप लगाते हैं. मेरे पास कोई सबूत नहीं है. लेकिन कई बातें जोड़ नहीं बैठतीं. प्रथम दृष्टि में लगता है कि कुछ गड़बड़ हुई, लेकिन हमें पता नहीं क्या." इसके अलावा, जन सुराज के संस्थापक ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर आरोप लगाया कि चुनावी नतीजे प्रभावित करने के लिए उन्होंने बिहार में हजारों महिला मतदाताओं को पैसे बांटे.
जनसुराज संस्थापक ने कहा, "चुनाव की घोषणा के दिन से वोटिंग के दिन तक, महिलाओं को दस हजार रुपए दिए गए. यह राशि भी उनके वादे के मुकाबले पर्याप्त नहीं थी. उन्हें बताया गया था कि कुल दो लाख रुपए मिलेंगे, और यह दस हजार सिर्फ पहली किस्त है. अगर वे जाकर एनडीए के लिए, नीतीश कुमार के लिए वोट देंगी, तो बाकी मिल जाएंगे. बिहार में या देश में कहीं भी, मुझे याद नहीं कि कोई सरकार कभी 50,000 महिलाओं को इस तरह पैसे बांटती हो."
जन सुराज के खिलाफ एक और बड़ा फैक्टर काम किया, वो था लालू के जंगल राज की वापसी का डर. उन्होंने कहा, "अंतिम चरण की मुहिम तक, कई मतदाताओं ने मान लिया था कि जन सुराज जीतने की स्थिति में नहीं है. उनकी चिंता सरल थी: अगर उन्होंने हमें वोट दिया और हम नहीं जीते, तो कहीं इससे लालू के जंगल राज की वापसी का रास्ता न बन जाए. वह डर निश्चित रूप से कुछ लोगों को हमसे दूर ले गया." उन्होंने अपनी राजनीतिक करियर के खत्म होने की टिप्पणियों को भी खारिज कर दिया.
जब आलोचकों द्वारा उनकी राजनीतिक मौत लिखने के बारे में पूछा गया, तो किशोर ने जवाब दिया: "ये वही लोग हैं जो मेरी जीत पर तालियां बजाते थे. अगर वे मेरी मौत लिख रहे हैं, तो यह उनके बारे में नहीं है. यह मेरे अगले कदम पर निर्भर है. अगर मैं सफल हुआ, तो वे फिर तालियां बजाएंगे. वे अपना काम कर रहे हैं और मैं अपना. जो मुझे आलोचना कर रहे हैं, वे मुझमें सबसे ज्यादा उत्सुक हैं. यह सिर्फ दिखाता है कि मैं अभी मरा नहीं हूं. अभी कहानी बाकी है."
जन सुराज पार्टी, जिसने बिहार चुनावों में 243 में से 238 सीटों पर अपना दमखम आजमाया, पूरी तरह से शून्य पर आउट हो गई. उसने एक भी निर्वाचन क्षेत्र नहीं जीता और, अपनी शुरुआती अनुमान के अनुसार, सिर्फ 2 से 3 प्रतिशत वोट ही हासिल कर पाई. उसके ज्यादातर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई.