क्या प्रतीक यादव को उनके घर में ही किसी ने मारा? शरीर के ज्यादातर हिस्से में चोट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट कर देगी हैरान!

Global Bharat 14 May 2026 10:21: AM 2 Mins
क्या प्रतीक यादव को उनके घर में ही किसी ने मारा? शरीर के ज्यादातर हिस्से में चोट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट कर देगी हैरान!

Prateek Yadav death : लखनऊ में सियासी ड्रामा बढ़ सकता है. अपर्णा यादव के घर पर योगी की पुलिस क्या तलाश रही है. आख़िर अपर्णा यादव के पति के साथ उनके ही घर में पिछले एक हफ्ते से ऐसा क्या हो रहा था जिसकी भनक किसी को नहीं लगी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 6 ऐसी बातें लिखी हैं जो समझ से परे है. शरीर पर चोट के कुल 6 निशान हैं. ये रिपोर्ट अगर आपने पढ़ ली तो आधा केस आप भी समझ सकते हैं. 

प्रतीक के दाहिने हाथ की कलाई पर चोट का गहरा निशान है. कोहनी से कलाई तक निशान के कारण शरीर का रंग नीला पड़ गया था. 24X8 सेंटीमीटर की ये चोट कैसे लगी, प्रतीक ने खुद हाथ ज़मीन पर मारा या किसी ने उनके हाथ पर मारा, यह जांच का विषय है. प्रतीक के छाती के सामने एक बड़ा निशान है. करीब 14X7 सेंटीमीटर का गहरा निशान लाल पड़ चुका था. चोट का निशान इतना गहरा था कि अंदर का खून जम गया. सवाल उठता है ये चोट अगर दो या चार दिन पुरानी थी तो फिर इसका इलाज क्यों नहीं करवाया गया. जिम ट्रेनर प्रतीक की छाती पर गहरी चोट कैसे लगी ?
प्रतीक के शरीर पर तीसरा निशान  19X12 सेंटीमीटर यानि काफी बड़े आकार में दाईं हाथ के ऊपरी और निचले हिस्से में अंदरुनी ब्लीडिंग के कारण चोट के निशान दिखे.

दाहिने हाथ की कोहनी पर 15 सेंटीमीटर नीचे एक और निशान है. दाहिने हाथ पर कई निशान मिलते हैं, प्रतीक के शरीर के दाहिने हिस्से पर ज्यादा चोट के निशान हैं. ये कैसे संभव हो सकता है. प्रतीक दाहिने हाथ से लिखते थे यानि क्या कोई इतना ताकतवर था कि प्रतीक के दाहिने तरफ हमला कर रहा था लेकिन वो रोक नहीं पाए. ये जांच का विषय हो सकता है.

डॉक्टरों की टीम अपनी रिपोर्ट में लिखती है, चोट का वक्त लगभग पांच से सात दिन पुराना हो सकता है, यानि ये सबकुछ करीब एक हफ्ते से चल रहा था. जबकि कई चोटें ऐसी हैं जो सिर्फ 24 घण्टे से 30 घण्टे पुरानी हो सकती है, मौत के ठीक 6 घण्टे के भीतर पोस्टमार्टम शुरू होता है, और जल्द ही पूरा कर लिया जाता है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी चोट का ये मतलब भी हो सकता है कि ये खुद को पहुंचाई गई चोट हो सकती है, क्योंकि कोई घाव नहीं मिला है, यानि किसी हथियार के निशान नहीं हैं, आम तौर पर ऐसी चोटें तब लगती है जब कोई खुद का हाथ या शरीर का कोई हिस्सा ज़मीन पर या दीवार पर मारे, हालांकि सीने पर लगी गहरी चोट से राज़ गहरा जाता है. शरीर के पिछले हिस्से में कोई चोट नहीं है, गर्दन पर कोई चोट के निशान नहीं है, क्या ये इशारा है कि घर में प्रतीक अकेले थे.

 क्या अपर्णा असम में थी और प्रतीक डिप्रेशन का शिकार हो चुके थे. प्रतीक एक अच्छे इंसान थे. मिलनसार थे. खुश रहते थे. अखिलेश यादव ने मौत के कुछ घण्टे बाद ही ये कहा था कि व्यापार में घाटा हुआ था. तो क्या अपनों से दूर होना, व्यापार में घाटा होना और अकेलेपन की वजह से हुई ये मौत है. ये चोट के निशान मौत की गुत्थी उलझा सकती है. क्योंकि, डॉक्टर्स ने दिल और शरीर के कई अंग को सुरक्षित रखा है. जरूरत पड़ने पर उसकी जांच हो सकती है. फोरेंसिक जांच से कोई बड़ा खुलासा हो सकता है.

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