7 ठाकुरों ने एक दलित के साथ प्रयागराज में जो किया, पुलिस जांच में क्या क्या खुलासा हुआ?

Abhishek Chaturvedi 14 Apr 2025 09:04: PM 2 Mins
7 ठाकुरों ने एक दलित के साथ प्रयागराज में जो किया, पुलिस जांच में क्या क्या खुलासा हुआ?

नई दिल्ली: ये हैं यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय, जिनके सामने प्रयागराज के एक गांव के लोग नारे लगा रहे हैं, बाबा का बुलडोजर कहां गया, अखिलेश यादव ट्वीट कर पूछ रहे हैं बुलडोजर कब चलेगा, मायावती ट्वीट कर लिख रही हैं सामंती तत्वों ने एक दलित के साथ बेहद गलत किया, चंद्रशेखर साफ लिखते हैं पहले इतनी बड़ी वारदात, उसके बाद पूरे परिवार को धमकी दी गई,तो सवाल है आखिर वो 7 दबंग ठाकुर कौन हैं, जिन्होंने एक प्रयागराज के इसौटा गांव में एक दलित युवक के साथ इतनी बेरहमी की, तो पहले वो सुनिए, फिर बताते हैं पुलिस की जांच में क्या-क्या खुलासा हुआ. 

FIR में पीड़ित के पिता अशोक कुमार ने लिखा है कि 12 अप्रैल की रात करीब 10.30 बजे गांव के ही दिलीप सिंह अपने खेत में बोझा ढोने के लिए मेरे लड़के देवीशंकर को लेकर गए. दूसरे दिन सुबह करीब 5.30 बजे पूरब महुआ के बगीचे में बेटे की बॉडी मिली. गांव के ही छुट्टन सिंह, मोहित गुप्ता, अजय सिंह, मनोज सिंह, सोनू सिंह, शेखर सिंह ने उसके साथ योजनाबद्ध तरीके से ऐसा किया. 13 अप्रैल की सुबह इन्होंने घर आकर गाली-गलौच भी की और कहा सबका यही हाल करेंगे. इनके खिलाफ कार्रवाई की जाए. पुलिस ने जांच के बाद 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

एसीपी करछना का कहना है कि मुख्य आरोपी छुट्टन सिंह की तलाश की जा रही है. आरोपियों से पूछताछ की जा रही है कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, सोशल मीडिया पर इस मामले को ठाकुर बनाम दलित बनाने की कोशिश में कई लोग लगे हैं. वहां के लोगों का दावा है कि 35 साल के देवीशंकर ने बोझा ढोने से मना किया, इसलिए ऐसा किया, हालांकि कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि इसकी पुरानी रंजिश थी. सच्चाई क्या है, ये जांच के बाद पता चलेगी, मौके पर पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है.

अखिलेश यादव ने इसे सत्ता से जोड़ते हुए लिखा है कि बाबासाहेब की जयंती के पहले ऐसी घटना को अंजाम देकर कुछ शक्तिशाली लोग अपनी ताकत का जो संदेश समाज को देना चाहते हैं, वो लोग एक बीमार सोच से ग्रसित नकारात्मक और अत्याचारी लोग हैं। देखते हैं इन दबंग आपराधिक तत्वों के घर पर बुलडोजर भेजने का नैतिक बल और ऊर्जा किसी में शेष बची है। या फिर वो अपराधियों के सामने सरेंडर करके, ठंडे पड़ गए हैं?

सियासत से हटकर सोचें तो एक परिवार जिसने अपना इकलौता बेटा खोया है, उसे हरसंभव मदद और त्वरित इंसाफ दोनों मिलना चाहिए. नेताओं का क्या है, वो अपने सियासी फायदे की घटना पर जुबान खोलते हैं. चंद्रशेखर हों या अखिलेश यूपी में दलितों के साथ अन्याय पर जुबान खोलते हैं. पर बंगाल के मुर्शिदाबाद में जब घटना होती है तो चुप्पी साध लेते हैं. 

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