नई दिल्ली: विदिशा जिले के गंजबासौदा में बिजली विभाग की सख्ती से लोगों का आक्रोश सड़क पर उतर आया. 29 दिसंबर को बिना कोई नोटिस दिए एक साथ दो सौ से ज्यादा घरों के कनेक्शन ऑनलाइन सिस्टम से डिस्कनेक्ट कर दिए गए, जिसके बाद मंगलवार शाम उपभोक्ता बिजली कंपनी के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए.
धरने में शामिल लोगों ने गुस्से से कहा कि नियम के मुताबिक कनेक्शन काटने से पहले कम से कम नोटिस तो देना चाहिए. उनकी मांग है कि पहले सभी कनेक्शन बहाल किए जाएं और बकाया भुगतान के लिए कम से कम आठ दिन का समय दिया जाए. एक बुजुर्ग महिला आशा देवी ने बताया कि उन्होंने अपनी पायल तक गिरवी रखकर एक हजार रुपये जमा किए, लेकिन फिर भी उनका कनेक्शन नहीं जोड़ा गया. इस पर लोगों का गुस्सा और भड़क उठा.
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बिजली कंपनी गरीब और आम उपभोक्ताओं को ही निशाना बना रही है. एक उपभोक्ता अनिल पाठक ने कहा कि भाजपा पार्षदों के लाखों रुपए के बिल बकाया हैं, लेकिन उनके कनेक्शन नहीं काटे जा रहे. मेरे सिर्फ सात हजार के बिल पर सप्लाई बंद कर दी गई, जबकि पार्षद का लाखों का बकाया होने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई.
युवक कांग्रेस अध्यक्ष आकाश शर्मा ने कहा कि अगर कंपनी पहले सात दिन का नोटिस देकर कनेक्शन काटती है तो हमें कोई एतराज नहीं, लेकिन बिना सूचना के इस तरह की कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी. मौके पर पहुंचे सहायक अभियंता संत्री वर्गीस ने लोगों को समझाने की कोशिश की कि बिल जमा करने पर तुरंत कनेक्शन जोड़ दिया जाएगा, लेकिन उपभोक्ता पहले बिजली बहाल करने पर अड़े रहे. काफी देर तक बातचीत होती रही, लेकिन सहमति नहीं बनी और धरना देर रात तक चलता रहा.
दरअसल, जिन घरों में स्मार्ट मीटर लगे हैं, उन्हीं के कनेक्शन एक क्लिक में दूर से ही काट दिए गए. मीटर में इंडिकेटर लाइट जल रही है, इसलिए कई लोगों को लगा कि घर की वायरिंग में कोई फॉल्ट है. उन्होंने इलेक्ट्रीशियन बुलाकर चेक कराया, लेकिन जब पड़ोसियों से पता चला कि सबका यही हाल है, तब समझ आया कि कंपनी ने रिमोट तरीके से सप्लाई बंद कर दी है.