नई दिल्ली: संसद के शीत सत्र में मंगलवार को लोकसभा में चुनावी बदलावों पर बहस के दौरान भारी हंगामा मचा. विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ईवीएम में छेड़छाड़, वोटर लिस्ट में फर्जीवाड़ा और आरएसएस द्वारा सभी संस्थानों पर कब्जा जमाने जैसे गंभीर इल्जाम लगाए. इसके जवाब में भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने कड़ा हमला बोलते हुए याद दिलाया कि ईवीएम की शुरुआत राजीव गांधी के दौर में ही हुई थी.
राहुल के संबोधन के फौरन बाद बोलते हुए दुबे ने गर्व से कहा कि वे आरएसएस से जुड़े हैं. उन्होंने राहुल पर व्यंग्य कसते हुए कहा, हरि भजन करने आए थे, लेकिन कपास ओटने लगे. पहाड़ खोदा तो चूहा निकला. यह वही कांग्रेस है जो शहीदों की चिताओं पर टिकी है, जिसने मुल्क को तोड़ा. आज राहुल कांपते और घबराए दिख रहे थे. अचानक वे संविधान की दुहाई देने लगे. मैं 1976 के पूरे संविधान संशोधन बहस की कॉपी लाया हूं – कैसे कांग्रेस ने संविधान को रौंदा, इसका उनके पास कोई उत्तर नहीं.
दुबे ने चुनाव सुधारों पर कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा, 'इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति को रबर स्टैंप बना डाला, मीडिया की स्वतंत्रता छीन ली, अपने पसंदीदा को चीफ जस्टिस बनवाया. और ईवीएम भारत में पहली बार राजीव गांधी के समय आईं.' उन्होंने जोड़ा कि 1961 और 1971 में ही विशेष गहन जांच (SIR) और ईवीएम की आवश्यकता पर विचार हो चुका था.
वोटर लिस्ट की विशेष गहन जांच (SIR) पर बहस में राहुल ने तीन सवाल उठाए, जिनसे साबित होता है कि भाजपा चुनाव आयोग का दुरुपयोग कर लोकतंत्र को कमजोर कर रही है:
राहुल ने इसके अलावा चार मांगें भी कीं – ईवीएम-वीवीपैट की पूरी तरह जांच, वोटर लिस्ट से बड़े स्तर पर नाम हटाने की जांच, नियुक्ति समिति में सीजेआई की बहाली और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता. भाजपा सांसदों ने राहुल के इल्जामों को सिरे से नकारते हुए इसे लोकतंत्र पर आघात बताया. लोकसभा में इस विषय पर चर्चा अभी चल रही है.