राजनीतिक पार्टियों ने आगामी लोकसभा चुनावों के लिए अपने-अपने उम्मीदवार घोषित करने शुरू कर दिए हैं, इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा बहुत अहम मोड़ से गुजर रही है।
राजस्थान के बांसवाड़ा में रैली के दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के पांच वादों की घोषणा की। युवाओं को लेकर पार्टी की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए, राहुल गांधी ने बेरोजगारी से निपटने, अस्थायी श्रमिकों का समर्थन करने और उद्यमिता को बढ़ावा देने का विश्वास दिलाया।
सरकारी विभागों में खाली पड़ी रिक्तियों की बात करते हुए, राहुल ने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो पार्टी की पहली प्राथमिकता अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति और अल्पसंख्यकों — जोकि जनसंख्या का 90 प्रतिशत हैं — पर सामूहिक रूप से ध्यान केंद्रित करते हुए 30 लाख सरकारी नौकरियों में से 90 प्रतिशत को भरना होगा।
देश के युवाओं!
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 7, 2024
कांग्रेस आपको 5 ऐतिहासिक गारंटियां दे रही है जो आपकी तकदीर बदल देगी।
1. भर्ती भरोसा : 30 लाख सरकारी पदों पर तत्काल स्थायी नियुक्ति की गारंटी।
2. पहली नौकरी पक्की : हर ग्रेजुएट और डिप्लोमाधारी को एक लाख रू प्रतिवर्ष स्टाइपेंड के अप्रेंटिसशिप की गारंटी।
3. पेपर… pic.twitter.com/jC62VgPKzM
इसके साथ ही राहुल ने प्रत्येक स्नातक या डिप्लोमा धारक के लिए एक नया "प्रशिक्षुता का अधिकार" प्रस्तावित किया, जिसमें एक निजी कंपनी या सरकारी कार्यालय में एक साल की प्रशिक्षुता की गारंटी दी जाएगी। साथ ही 1 लाख रुपये का वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। मनरेगा के समान इस पहल का लक्ष्य देश भर में लाखों युवाओं को लाभ पहुंचाना है।
तीसरे वादे में परीक्षा आयोजित करने के लिए एक मानकीकृत प्रारूप स्थापित करके पेपर लीक से निपटने के लिए एक कानून बनाना, निजी कंपनियों को परीक्षा प्रक्रियाओं की आउटसोर्सिंग को समाप्त करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राजस्थान में लागू गिग वर्कर्स अधिनियम की तर्ज पर एक राष्ट्र व्यापी कानून लाने का वादा किया।
'स्टार्ट अप इंडिया' और 'मेक इन इंडिया' की कथित कमियों को उजागर करते हुए, राहुल ने युवा रोशनी नामक योजना के तहत हर जिले में 5,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ एक स्टार्ट अप फंड बनाने का भी वादा किया।
इसके अलावा, कांग्रेस नेता ने पार्टी के घोषणापत्र में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी प्रदान करने के अपने वादे को दोहराते हुए किसानों के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता भी दर्शाई। उन्होंने वंचित समुदायों से अपनी ताकत पहचानने का आग्रह किया और इस बात पर जोर दिया कि लगभग 90 प्रतिशत भारतीय आबादी में एससी, एसटी, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक शामिल हैं।
राहुल ने कहा कि इन समुदायों की महत्वपूर्ण आबादी के बावजूद इनकी भारतीय संस्थानों और बजट में न्यूनतम भागीदारी है। जाति जनगणना की वकालत करते हुए, उन्होंने इसकी तुलना एक एक्स-रे से की, जो भारत में गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से वंचितों द्वारा झेली गई असमानताओं और अन्याय की वास्तविक सीमा को उजागर करेगा।