नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अलग-अलग जगहों पर चल रहे आंदोलनों को एक मंच पर लाने के लिए डिजिटल ‘सत्याग्रह’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है. लेकिन इसी समय कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने ‘स्वघोषित लिबरल इकोसिस्टम’ पर निशाना साधते हुए तीखा हमला बोला है. नाम न लेते हुए भी कई कांग्रेस नेताओं ने इसे अपने पार्टी पर हमला माना है. इससे विपक्षी खेमे में नई दरार साफ दिख रही है.
राहुल गांधी ने 3 अक्टूबर को सत्याग्रह पहल की घोषणा करते हुए कहा कि देशभर में छात्र, किसान, आदिवासी, दलित, महिलाएं और युवा अपने अधिकारों के लिए अकेले लड़ रहे हैं. उन्होंने इन आवाजों को जोड़ने और संसद, सड़क या पत्रों के जरिए समर्थन देने का वादा किया. सोमवार शाम तक इस प्लेटफॉर्म पर देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों से करीब 29,000 आवाजें दर्ज हो चुकी थीं. शिक्षा, भ्रष्टाचार और जातिगत भेदभाव सबसे प्रमुख मुद्दे रहे.
इसके लगभग समानांतर CJP के नेताओं अशुतोष रांका और सौरव दास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि एक ‘स्वघोषित लिबरल इकोसिस्टम’ अभिजीत दिपके और CJP को बदनाम करने में लगा है. सौरव दास ने साफ कहा कि सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि एक और पार्टी भी खुद को संविधान का ठेकेदार और लोकतंत्र का रक्षक मानती है. उन्होंने इसे ‘नमकीन इकोसिस्टम’ बताया जो कभी-कभी भाजपा से भी बदतर व्यवहार करता है.
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि युवा पहले से ही राजनीतिक पार्टियों की आपसी खींचतान से परेशान हैं. वे लोगों की बजाय अपनी प्रमुखता की ज्यादा चिंता करते हैं. कांग्रेस नेताओं ने इन टिप्पणियों को अपने खिलाफ माना. कुछ ने CJP पर सवाल उठाए कि मुंबई में उनके प्रदर्शनकारियों को आजादी क्यों मिली जबकि एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया. एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने CJP से कहा कि अगर वे कांग्रेस से भिड़ना चाहते हैं तो राजनीतिक दल बनाकर आएं. वहीं कांग्रेस से जुड़े तुषार गांधी ने अपनी पार्टी से कहा कि समर्थकों को काबू में रखें क्योंकि CJP, AISA और कांग्रेस एक ही दुश्मन से लड़ रहे हैं.
यह तनाव असम में CJP के स्कूल ऑडिट अभियान के दौरान भी दिखा था. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उन्होंने CJP कार्यकर्ताओं की रिहाई में मदद की, लेकिन CJP नेताओं ने कांग्रेस से मिलने से इनकार कर दिया. दोनों पक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, नीट पेपर लीक और अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक जैसे मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. CJP खुद को विकेंद्रीकृत और स्वतंत्र आंदोलन बताता है, जबकि कांग्रेस इसे AAP से जुड़ा बताती रही है.
राहुल गांधी का सत्याग्रह अभियान उन प्रदर्शनों के बीच आया है जो ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई सहित कई शहरों में चल रहे हैं. विपक्षी दलों और नागरिक समाज के संगठनों ने भी इन प्रदर्शनों में हिस्सा लिया है. लेकिन कांग्रेस और CJP के बीच यह सार्वजनिक रस्साकशी साफ बताती है कि विपक्षी खेमे में एकजुटता के साथ-साथ जगह, श्रेय और नेतृत्व को लेकर भी प्रतिस्पर्धा जारी है.