अयोध्या केस के दूसरे आरोपी राजू खान की मां ने जो खुलासा किया है, उसे सुनकर यूपी पुलिस भी दंग रह गई. इस बयान को सुनने के बाद हो सकता है आप भी कहें बाबा जांच की दिशा बदलनी होगी. सीतापुर के रहने वाले राजू खान की मां एक मीडिया कैमरे पर कहती हैं. वो 5-6 महीने से मोईद खान के यहां नौकरी कर रहा था, वो मेरे चार बेटों में से सबसे छोटा है.
उसी के कमाने से घर का खर्चा चलता था, एक दिन मैं उसके पास रहने भी गई थी. कुछ दिन तक वहां रही फिर लौट आई, वो जितना कमाता था सब घर पर दे देता था. पता नहीं ऐसा उसने किसके कहने पर किया है. हम न तो ज्यादा पढ़े-लिखे हैं, न इतनी बात समझते हैं, लेकिन इतना ही कहूंगी कि अगर उसकी गलती नहीं है तो उसको छोड़ देना चाहिए. पता नहीं वो कब आएगा, हमारे घर कमाने वाला वही था. इतना कहते हुए राजू खान की मां कैमरे पर भावुक हो जाती है, लेकिन इसी के साथ तीन बड़े सवाल भी खड़े होते हैं, जिसका सही जवाब सलाखों के पीछे कैद राजू खान ही दे पाएगा.
सवाल नंबर 1- क्या राजू खान बेकरी पर काम करने के अलावा कुछ और भी करता था? सारा पैसा घर दे देता था तो अपना खर्चा कैसे चलाता था?
सवाल नंबर 2- क्या राजू खान और मोईद खान का संपर्क किसी ऐसे लोगों से भी है, जो हिंदुस्तान के खिलाफ काम करते हैं?
सवाल नंबर 3- जब राजू खान 6 महीने पहले ही बेकरी में नौकरी करने गया था, तो उस लड़की से इतनी जल्दी इसका अफेयर कैसे चलने लगा, क्या ये कहानी झूठी है?
यही वो सवाल हैं, जिनका जवाब पुलिस को अब तक सही तरीके से नहीं मिल पाया है और अब वो मोईद खान के साथ-साथ राजू खान की डीएनए टेस्ट की भी तैयारी में है. डीएनए टेस्ट में ये साफ हो जाएगा कि लड़की के पेट में जो पाप पल रहा था, जिसका सैंपल लेकर डॉक्टर्स की टीम ने लखनऊ के एक लैब में रख दिया है. उसका असली पिता कौन था, दोनों में से किसी एक का ही डीएनए उशसे मैच करेगा ये बात भी सच है.
फिर सवाल उठता है कि क्या दूसरा आरोपी छूट जाएगा. हमने इसे समझने के लिए जब कुछ पन्ने खंगाले तो हैरान करने वाली जानकारी मिली. जुलाई 2022 में एक ऐसा ही मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में पहुंचा था, जहां एक आरोपी ने पड़ोस में रहने वाली 14 साल की लड़की के साथ गलत किया था और उसकी डीएनए रिपोर्ट नेगेटिव आई, जिसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति भारती डांगरे ने कहा था. डीएनए जांच से आरोपी भले ही उस बच्चे का पिता नहीं साबित होता लेकिन इससे पीड़िता को झूठा नहीं माना जा सकता जिसे अपने 164 के बयान में कहा है कि आरोपी ने पैसों का लालच देकर और डरा-धमकाकर उसके साथ गलत किया.
ऐसे मामलों में धारा 164 के तहत दर्ज बयान और गिरफ्तारी के वक्त करवाए गए मेडिकल टेस्ट को अदालत पर्याप्त सबूत मानती है. आखिर में ये तय करना अदालत का काम है कि डीएनए रिपोर्ट नेगेटिव आई है तो क्या फैसला होना चाहिए और पॉजिटिव आई है तो क्या फैसला होना चाहिए. राजू खान और मोईद खान के केस में वीडियो साक्ष्य बहुत बड़ा है.
एफआईआर में इस बात का जिक्र है कि वीडियो दिखाकर वो लंबे वक्त तक गलत करते रहे. इसलिए वीडियो साक्ष्य के आधार पर दोनों को कड़ी सजा हो सकती है. खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में लड़की के परिवारवालों को भरोसा दिया है कि इंसाफ मिलेगा. इसलिए दोनों आरोपियों के जेल में भी पसीने छूट रहे हैं और दोनों बस यही कह रहे हैं कि प्लीज ये वाला टेस्ट मत करवाइए, हमें छोड़ दीजिए.