नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच तुर्की के इस्तांबुल में हुई दूसरी शांति वार्ता 2 जून 2025 को महज एक घंटे में ही खत्म हो गई. यह वार्ता तुर्की के सिरागन पैलेस में हुई, लेकिन इसमें कोई बड़ा नतीजा नहीं निकला. यह वार्ता पहले ही निर्धारित समय से दो घंटे देरी से शुरू हुई थी, जिसका कोई कारण भी नहीं बताया गया. बताते चलें कि वार्ता से ठीक एक दिन पहले, 1 जून को यूक्रेन ने रूस के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बमवर्षक विमानों पर बड़ा ड्रोन हमला किया था, जिससे रूस में गुस्सा भड़क गया. इस हमले ने वार्ता के माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया.
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इसी बीच शांति वार्ता के बाद कुछ शर्ते पता चली है. दरअसल, तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने वार्ता की शुरुआत में दोनों पक्षों से युद्धविराम की दिशा में कदम उठाने की अपील की, लेकिन रूस की मांगें यूक्रेन के लिए अस्वीकार्य थीं. रूस ने वार्ता में कई ऐसी मांगें रखीं, जिन्हें यूक्रेन और उसके सहयोगियों ने “अवास्तविक” और “अस्वीकार्य” बताया. अब इससे एक बात तो स्पष्ट है कि रूस की सख्त मांगों के कारण युद्धविराम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.
रूस ने क्या-क्या मांग रखी
बता दें कि यूक्रेन ने शांदी वार्ता से ठीक एक दिन पहले रविवार को ''स्पाइडर वेब'' नाम से एक साहसी हमला किया था, जिसमें उसने साइबेरिया और रूस के अन्य हिस्सों में स्थित हवाई अड्डों पर रूस के रणनीतिक बमवर्षक विमानों को निशाना बनाया. यूक्रेन का दावा है कि इस हमले में रूस के दर्जनों बमवर्षक नष्ट हुए, जिनकी कीमत अरबों डॉलर थी. ये विमान रूस के परमाणु हथियारों का अहम हिस्सा हैं. हालांकि, रूस और यूक्रेन ने इस हमले से हुए नुकसान के बारे में अलग-अलग दावे किए हैं. सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि रूस को अपने सैन्य उपकरणों का भारी नुकसान हुआ.
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इस हमले ने रूस में गुस्सा पैदा किया, और कई रूसी युद्ध ब्लॉगर्स ने जवाबी हमले की मांग की. इसी बीच तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने वार्ता की शुरुआत में कहा कि पूरी दुनिया की नजर इस मुलाकात पर है. उन्होंने बताया कि इस बैठक का मकसद युद्धविराम की शर्तों पर चर्चा करना, रूस और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों की संभावित मुलाकात पर विचार करना, और कैदियों की अदला-बदली के अवसर तलाशना था. वार्ता में दोनों पक्ष एक-दूसरे के सामने बैठे, लेकिन माहौल तनावपूर्ण रहा. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने लिथुआनिया से कहा कि दोनों पक्ष एक नया कैदी आदान-प्रदान तैयार कर रहे हैं.
इन बातों पर बनी सहमति
वार्ता में कुछ छोटी सहमतियां बनीं. दोनों पक्षों ने गंभीर रूप से घायल और युवा युद्धबंदियों की अदला-बदली पर सहमति जताई. यूक्रेन के रक्षा मंत्री रुस्तम उमेरोव ने बताया कि इस बार 1,200-1,200 कैदियों की अदला-बदली हो सकती है, जिसमें पत्रकार और राजनीतिक कैदी भी शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा, दोनों पक्ष 6,000-6,000 सैनिकों के शवों की अदला-बदली करेंगे.
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यूक्रेन ने रूस को उन सैकड़ों बच्चों की सूची सौंपी, जिन्हें रूसी सेना ने जबरन यूक्रेन से रूस ले जाया था. यूक्रेन का कहना है कि ये बच्चे अवैध रूप से अपहृत किए गए, जबकि रूस का दावा है कि उन्हें युद्ध से बचाने के लिए ले जाया गया. यूक्रेन ने इन बच्चों की वापसी को शांति समझौते का अहम हिस्सा बताया.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या चल रहा है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों पक्षों पर शांति के लिए दबाव डाला है. ट्रंप ने कहा कि अगर वार्ता में प्रगति नहीं हुई, तो अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका छोड़ सकता है. यूक्रेन ने ट्रंप से रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की मांग की, लेकिन ट्रंप ने अभी तक ऐसा नहीं किया. तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने ज़ेलेंस्की और पुतिन की मुलाकात तुर्की में कराने की पेशकश की. जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने भी वाशिंगटन में ट्रंप से मुलाकात के दौरान निष्पक्ष युद्धविराम की वकालत की.
अब आगे क्या हो सकता है?
यूक्रेन ने जून के अंत तक तीसरे दौर की वार्ता का प्रस्ताव रखा है. उसका कहना है कि रूस की शर्तें युद्ध समाप्त करने के बजाय यूक्रेन को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर करती हैं. यूक्रेन के रक्षा मंत्री ने कहा कि रूस ने पहली बार अपनी शर्तें लिखित रूप में दीं, जिनका अध्ययन किया जाएगा. रूस के वार्ताकार व्लादिमीर मेदिंस्की ने कहा कि मॉस्को का मकसद युद्ध को लंबा खींचना नहीं है, लेकिन वह अपनी शर्तों पर ही शांति चाहता है.