वाशिंगटन: अमेरिकी नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन पर तैनात नाविकों में मानसिक तनाव और आत्महत्या के विचारों की खबरें सामने आने के बाद अमेरिका मिडिल ईस्ट में इसकी जगह यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन को तैनात करने की तैयारी कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाज पर सवार कई नाविकों ने समुद्र में कूदने का विचार किया या कोशिश की.
कम से कम एक मामले में साथी नाविक ने ऐसे प्रयास को रोक लिया. नाविकों के परिवारों और सांसदों ने चेतावनी दी है कि हालात बर्दाश्त से बाहर हो गए हैं. परिवारों का आरोप है कि जहाज पर फफूंद वाले शावर, टूटे शौचालय, हफ्तों से बंद लॉन्ड्री, लंबे समय तक गर्म पानी की कमी और भोजन के नाम पर सिर्फ आधा कप चावल व दो टॉर्टिला जैसी स्थितियां बनी हुई हैं. साबुन, डियोड्रेंट और टूथपेस्ट जैसी बुनियादी चीजें भी उपलब्ध नहीं थीं.
सैन डिएगो में करीब 200 परिजनों की टाउन हॉल बैठक में एक महिला ने बताया कि उनके पति ने मैसेज कर कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि वे अगली सुबह नहीं उठेंगे. तैनाती बार-बार बढ़ाए जाने के कारण थकान और मानसिक तनाव बढ़ा है. यूएसएस अब्राहम लिंकन करीब 5,000 नाविकों और मरीनों के साथ 21 नवंबर को सैन डिएगो से रवाना हुआ था. शुरुआत में प्रशांत क्षेत्र की तैनाती थी, लेकिन यह असामान्य रूप से लंबी हो गई और नाविकों ने समुद्र में 250 से ज्यादा दिन बिताए.
अमेरिकी नौसेना ने कहा है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर जहाज पर आत्महत्या के विचारों या प्रयासों में कोई वृद्धि नहीं देखी गई. अधिकारियों का दावा है कि नाविकों के स्वास्थ्य और भलाई को प्राथमिकता दी जा रही है. स्वच्छ पानी, काम करने वाले एसी और स्वस्थ भोजन के विकल्प पहुंचाए जा रहे हैं.
अधिकारियों के अनुसार, यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन की तैनाती पहले से तय रोटेशन का हिस्सा है. यह कैरियर हाल ही में वियतनाम के दा नांग से निकला है और हिंद महासागर की ओर बढ़ रहा है. परिवारों और सांसदों की चिंताओं के बीच अमेरिकी नौसेना स्थिति पर नजर रखे हुए है.