नई दिल्ली: प्रशांत महासागर में एक बेहद शक्तिशाली अल नीनो विकसित हो रहा है, जो पिछले सात दशकों में सबसे मजबूत हो सकता है. अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA की रिपोर्ट के अनुसार, यह 1950 के बाद अब तक का सबसे ताकतवर अल नीनो साबित होने वाला है. इसकी लगभग 70 प्रतिशत संभावना जताई गई है कि यह सुपर अल नीनो बनेगा.
सितंबर से इसका प्रभाव शुरू होने और साल के अंत तक चरम पर पहुंचने की आशंका है. भारत सहित पूरे उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों में इसके बेहद मजबूत होने की 90 प्रतिशत संभावना है. इससे देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल सकता है और कम बारिश के कारण सूखे जैसी स्थिति भी बन सकती है.
अल नीनो प्रशांत महासागर की सतह के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की प्रक्रिया है. इसके कारण भारत जैसे देशों में मानसून कमजोर पड़ता है, जबकि कुछ अन्य देशों में भारी बारिश और बाढ़ आती है. इस साल 1 जून से 13 अगस्त तक देश में सामान्य से 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. जून में तो बारिश 35 प्रतिशत से भी कम रही. भारत की लगभग आधी खेती मानसून पर निर्भर है. ऐसे में खरीफ फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है.
हालांकि थोड़ी राहत की बात यह है कि अल नीनो का पूरा प्रभाव मानसून के आखिरी चरण में ही साफ नजर आएगा. साथ ही सकारात्मक इंडियन ओशन डायपोल (IOD) इसके असर को कुछ हद तक कम कर सकता है. मौसम विभाग और वैज्ञानिक इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं. किसानों और आम लोगों को आने वाले महीनों में मौसम संबंधी अलर्ट्स पर ध्यान देना जरूरी होगा.