पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शपथग्रहण के ठीक एक दिन बाद बिहार सरकार में विभागों का वितरण कर दिया गया. इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिला – 20 वर्षों में पहली बार नीतीश ने गृह विभाग अपने पास रखने के बजाय उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंप दिया. भाजपा कोटे के इस वरिष्ठ नेता को अब कानून व्यवस्था, जेल और आपराधिक जांच जैसे संवेदनशील विभागों की जिम्मेदारी मिली है, जो राज्य सरकार की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने का संकेत दे रही है.
कुल 26 सदस्यीय नई कैबिनेट में अभी 18 मंत्रियों को विभाग आवंटित किए गए हैं. बाकी आठ मंत्रियों के विभागों का फैसला जल्द होने की उम्मीद है, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं. भाजपा को कृषि जैसे प्रमुख विभाग भी मिले हैं, जहां रामकृपाल यादव को कमान सौंपी गई है.
प्रमुख मंत्रियों के विभाग पर एक नजर
कैबिनेट में दलों का प्रतिनिधित्व
नीतीश कुमार की नई 26 सदस्यीय कैबिनेट में विविधता का ख्याल रखा गया है. भाजपा के 14 मंत्री हैं, जबकि जेडीयू के 8 सदस्य शामिल हैं. इसके अलावा चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से 2, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा से 1, और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी से 1 मंत्री हैं. कैबिनेट में एक मुस्लिम चेहरा (मो. जमा खान), तीन महिलाएं (श्रेयसी सिंह, लेसी सिंह, रमा निषाद), और तीन नए विधायक भी जगह बना चुके हैं.
नीतीश का 10वां कार्यकाल
एनडीए की प्रचंड जीत के बाद बिहार में नई सरकार का स्वरूप स्पष्ट हो गया है. हालिया विधानसभा चुनावों में गठबंधन ने 243 में से 202 सीटें जीतीं, जबकि महागठबंधन को महज 35 मिलीं. नीतीश कुमार ने गुरुवार को दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली – एक ऐसा रिकॉर्ड जो उन्हें बिहार के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेताओं की कतार में ला खड़ा करता है. उनका पहला कार्यकाल नवंबर 2005 से शुरू हुआ था, उसके बाद 2010, 2015 (दो बार), 2017, 2020, 2022 (दो बार) और अब 2024 में.
यह बंटवारा एनडीए की एकजुटता को दर्शाता है, जहां भाजपा को प्रमुख विभाग मिले हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे गठबंधन में संतुलन बना रहेगा, लेकिन शेष विभागों का फैसला भी उतना ही अहम होगा.