UGC विरोध में एक के बाद एक इस्तीफे, UP में तो और लंबी होती जा रही लिस्ट

Amanat Ansari 27 Jan 2026 09:17: PM 2 Mins
UGC विरोध में एक के बाद एक इस्तीफे, UP में तो और लंबी होती जा रही लिस्ट

नई दिल्ली: UGC के नए समानता नियमों (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) को लेकर उच्च शिक्षा क्षेत्र में काफी विवाद खड़ा हो गया है. ये नियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए गए थे, जिनका मकसद कैंपस पर जातिगत भेदभाव रोकना है, खासकर SC, ST और OBC छात्रों के लिए मजबूत शिकायत तंत्र बनाना. लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों और कुछ राजनीतिक हलकों में इसे "रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन" या सवर्ण विरोधी बताकर विरोध हो रहा है.

इस मुद्दे पर अब बीजेपी के अंदर भी असंतोष दिखाई दे रहा है. उत्तर प्रदेश के कई जिलों से पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं. वे इन नियमों को विभाजनकारी और काला कानून करार दे रहे हैं, जिससे पार्टी के लिए चुनौती बढ़ गई है.

रायबरेली के सलोन क्षेत्र से बीजेपी किसान मोर्चा के वाइस प्रेसिडेंट श्याम सुंदर त्रिपाठी ने इस्तीफा दिया. उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि ये नियम सवर्ण बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचा सकते हैं. वे पार्टी की इस नीति से असहमत बताते हुए पद छोड़ चुके हैं.

पीलीभीत के बिलसंडा इलाके में चपरौवा कुइयां गांव के भाजपा बूथ अध्यक्ष कृष्ण कुमार तिवारी ने भी इस्तीफा सौंपा. अपने पत्र में उन्होंने UGC के नए नियमों के अलावा SC/ST एक्ट जैसे कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि ये समाज में फूट डालते हैं. वे पार्टी की मौजूदा नीतियों से वैचारिक रूप से मेल नहीं खाते, इसलिए पद छोड़ रहे हैं.

नोएडा में बीजेपी युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष राजू पंडित ने भी तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने इसे सवर्ण हितों के खिलाफ बताया और कहा कि ऐसे कानून उनके आत्मसम्मान और विचारधारा के विरुद्ध हैं. उनका यह कदम पार्टी के युवा संगठन में असंतोष का संकेत देता है.

इसके अलावा लखनऊ में करीब 11 पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दिया था, जिसमें वे पार्टी पर आरोप लगा रहे थे कि यह उसके मूल उद्देश्यों से भटक रही है. अलग-अलग जिलों से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिससे पार्टी के अंदर से ही सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल उठ रहे हैं.

यह विरोध सिर्फ राजनीतिक नहीं रहा. दिल्ली में UGC दफ्तर के बाहर छात्रों ने प्रदर्शन किया, सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल हुई, और कई जगहों पर इसे वापस लेने की मांग हो रही है. केंद्र सरकार की ओर से स्पष्टीकरण आया है कि नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा और सभी वर्गों के हित सुरक्षित रहेंगे, लेकिन असंतोष अभी थमा नहीं दिखता. यह मामला अब सामाजिक-राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है.

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