नई दिल्ली: मुंबई महानगरपालिका (BMC) के हालिया चुनावों में बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है. कुल 227 सीटों वाले सदन में गठबंधन को 118 सीटें मिली हैं, जिसमें बीजेपी की 89 और शिंदे गुट की शिवसेना की 29 सीटें शामिल हैं. यह जीत ऐतिहासिक है क्योंकि इससे ठाकरे परिवार का 25 साल से ज्यादा पुराना BMC पर नियंत्रण टूट गया है. फिर भी, मुंबई के अगले महापौर (Mayor) को लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है.
गठबंधन के भीतर ही खींचतान
गठबंधन के भीतर ही खींचतान दिख रही है. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते अपना महापौर बनाने की स्थिति में है, लेकिन शिंदे गुट ने भी मजबूती से दावा ठोका है कि महापौर उनके गुट से होना चाहिए. उनका तर्क है कि मुंबई शिवसेना की पारंपरिक विरासत है (बाल ठाकरे की), और पिछले कई दशकों से यहां शिवसेना का ही महापौर रहा है.
शिंदे गुट ने इस दावे को मजबूत करने के लिए अपने सभी 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के एक लग्जरी होटल (ताज लैंड्स एंड) में ठहराया है. पार्टी इसे "रिफ्रेशमेंट, ओरिएंटेशन और विकास की रोडमैप पर चर्चा" बता रही है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे हॉर्स ट्रेडिंग या दल-बदल से बचाव की रणनीति माना जा रहा है.
शिंदे गुट की क्या है मांगें?
उधर, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने 65 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया है. उद्धव ने मातोश्री में नवनिर्वाचित पार्षदों को संबोधित करते हुए बीजेपी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने विश्वासघात से जीत हासिल की और मुंबई को गिरवी रखना चाहती है. उन्होंने दावा किया कि अगर शिंदे ने 2022 में विश्वासघात नहीं किया होता, तो मुंबई में बीजेपी का महापौर कभी नहीं बन पाता.
भाजपा पर गंभीर आरोप
उद्धव ने यह भी चेतावनी दी कि शिंदे गुट के कई पार्षद पहले उनके साथ थे, और बीजेपी मेयर पद के लिए तोड़फोड़ कर सकती है. साथ ही उन्होंने कहा कि ईश्वर की कृपा से उनका (UBT का) महापौर भी बन सकता है. संजय राउत जैसे UBT नेताओं ने तो यह तक कह दिया कि मुंबई में कोई बीजेपी का महापौर नहीं चाहता, शिंदे खुद भी नहीं. उन्होंने होटल वाली घटना को ताज होटल को जेल बनाने वाला बताया.
वर्तमान में महापौर पद का चुनाव अभी नहीं हुआ है. यह आमतौर पर सदन के विशेष सत्र में सभी पार्षदों की वोटिंग से तय होता है, और बहुमत वाली गठबंधन के पास ही फैसला होगा. लेकिन बीजेपी और शिंदे गुट के बीच सत्ता बंटवारे पर बातचीत चल रही है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सब कुछ सहमति से होगा और महायुति का ही महापौर बनेगा.