नई दिल्ली: गुरुग्राम स्थित एनजीओ एकम न्याय फाउंडेशन ने एक चौंकाने वाला रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले छह महीनों (जनवरी से जून तक) में पूरे भारत में 554 पतियों की हत्या या आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए. इनमें 322 पतियों की हत्या की गई, जबकि 232 पतियों ने आत्महत्या कर ली. यह रिपोर्ट मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है और फाउंडेशन ने 14 जुलाई तक के मामलों का दस्तावेजीकरण किया है.
फाउंडेशन का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई घटनाएं मीडिया में नहीं आतीं और भारत में पति हत्याओं या पुरुष घरेलू हिंसा के लिए कोई आधिकारिक राष्ट्रीय डेटाबेस नहीं है. रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि 322 हत्याओं में से 194 मामलों (60.2%) का कारण व्यभिचार बताया गया है. पत्नी और उसके प्रेमी मिलकर पति को रास्ते का रोड़ा समझकर मार डालते हैं. हत्या के तरीके बेहद क्रूर रहे. जहर देना, जिंदा जलाना, बिजली का शॉक, गला घोंटना, टुकड़े करना और हत्या को आत्महत्या या दुर्घटना बताकर छिपाना शामिल है.
आत्महत्याओं के पीछे क्या?
232 आत्महत्याओं में सबसे बड़ा कारण लंबे समय से चले आ रहे घरेलू विवाद (104 मामले) रहे. इसके अलावा पत्नी या ससुराल वालों द्वारा उत्पीड़न के 57 मामले और व्यभिचार से जुड़े 29 मामले. उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 93 हत्याएं और 103 आत्महत्या के मामले आए. मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार, कर्नाटक और गुजरात में भी ये मामले काफी संख्या में दर्ज किए गए.
एकम न्याय फाउंडेशन की संस्थापक दीपिका नारायण भारद्वाज ने कहा कि हर मामला एक परिवार की तबाही है. उन्होंने कहा कि आधिकारिक आंकड़ों में पति हत्याओं या पुरुषों पर घरेलू हिंसा के लिए अलग वर्गीकरण न होने से समस्या की सही तस्वीर नहीं बन पाती. कई पीड़ित सुसाइड नोट या वीडियो छोड़कर जाते हैं, जिसमें पत्नी, ससुराल और झूठे मुकदमों का जिक्र होता है. यह रिपोर्ट पुरुषों को भी घरेलू हिंसा और संबंधित समस्याओं का शिकार होने पर ध्यान देने की जरूरत पर जोर देती है.