हाथरस घटना ने कई परिवारों को उजाड़ दिया. किसी की मां नहीं रही तो किसी ने अपनी पत्नी को खो दिया तो किसी परिवार का ही नामो निशान मिट गया. चमत्कार का दावा करने वाले बाबा के कार्यक्रम में ही इतनी जाने चली गईं. जिन लोगों ने अपनों को खोया है वो रोते रोते बस यही कह रहे हैं कि ये बाबा सच में चमत्कारी है तो हमारे अपनों को बचा क्यों नहीं पाया? क्यों भक्तों के दुःख में साथ खड़े होने के बजाय छिपकर बैठा है? क्यों भक्तों की जान से ज्यादा इसे अपनी जान प्यारी है? खुद को भगवान कहता है क्या भगवान ऐसे होते हैं?
दर्द भरी आवाज़ में उठ रहे ये सवाल हर उस शख्स की जुबान पर है, जिसने अपनों को खो दिया. हर रोज मार्मिक कहानियां सामने आ रही हैं. अपनों को खोने का दर्द क्या होता है ये शब्दों में बयां भी नहीं किया जा सकता. खासकर जब वो दर्द अपने बच्चे को खोने का हो. वो बच्चा जो कई सालों की प्राथर्ना के बाद मिला हो. वैसे तो हाथरस में गई हर जान कीमती है.
हर किसी का दुःख कलेजा चीरने वाला है लेकिन इस आयोजन में पहुंचे किशोरी लाल की कहानी सुन आपकी आंखों से आंसू ज़रूर निकलेंगे. जिनके पास परिवार कहने के लिए अब कुछ भी नहीं बचा. किशोरी लाल अब खुद को इसलिए कोस रहे हैं क्योंकि इस हादसे में उनकी जान नहीं गई. ज़रा सोचिए क्या बीत रही होगी उस व्यक्ति पर जिसने कुछ घंटों में अपना पूरा परिवार खो दिया, उसका सब कुछ उजड़ गया. घटना में उनकी 42 वर्षीय पत्नी और महज 4 वर्ष के बेटे की दर्दनाक मौत हो गई है.
किशोरीलाल ने अपने 4 साल के बेटे को खो दिया. अपने बेटे को लेकर किशोरी लाला ने बताया कि 'शादी के 20 साल के इंतजार के बाद हमें एक बेटे के रूप में आशीर्वाद मिला था.' जब किशोरी लाल अपने ऊपर टूटे दुखों के पहाड़ की दांस्ता सुना रहे थे तो उनकी आंखों में आंसूं जुबान ऊपर भारी पन और चेहरे पर लाचारी थी.
उन्होंने कहा, 'पत्नी सत्संग के लिए गई थी और बच्चे को साथ लेकर गई थी. मैं खेती का सामान खरीदने के लिए कासगंज गया हुआ था. जब वापस आया, मैंने पत्नी को फोन लगाया. वहां से किसी अन्य व्यक्ति ने जवाब दिया और हुई भगदड़ के बारे में जानकारी दी. पता लगते ही अस्पताल की तरफ दौड़ा और वहां देखा कि हर तरफ चीख पुकार मची हुई थी. जान जाने वालों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे. उनमें से कुछ को देखने के बाद मुझे पत्नी और बेटा स्ट्रेचर पर नजर आए. मैं जिंदा क्यों हूं? मुझे भी उनके साथ चले जाना चाहिए था.'
हाथरस में हुई दिल दहला देने वाली घटना में जिन बच्चों की जान गई उनमें ज्यादातर बच्चों की उम्र 10 साल से कम थी. ये तो सिर्फ एक किशोरी लाल की कहानी है जिसे सुनकर हर किसी का दिल रो उठा है. लेकिन इस ढोंगी बाबा के कार्यक्रम के कारण न जाने कितने ही लोग अकेले रह गए.
भक्त आए थे बाबा रूपी इस ढोंगी का आशीर्वाद लेने लेकिन उन्हें नहीं पता था कि शायद अब वो कभी अपने घर वापस नहीं जा पाएंगे. इन लोगों के परिवारों को नहीं पता था कि वो कभी उन्हें देख नहीं पाएंगे. फिलहाल, उत्तर प्रदेश पुलिस बाबा की तलाश में कई स्थानों पर दबिश दे रही है. वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष जांच दल भी गठित करने का फैसला किया है.