बेलग्रेड: सर्बिया में एक ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है. छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच को चुनाव में हरा दिया. वुचिच ने रविवार को हार स्वीकार कर ली और एक दशक से अधिक समय से चले आ रहे उनके प्रभुत्व का अंत हो गया.
टेलीविजन संबोधन में वुचिच ने कहा, “यह साफ है कि हमने ये चुनाव हार गए हैं. स्टूडेंट लिस्ट जीत गई है.” प्रारंभिक नतीजों के अनुसार स्टूडेंट लिस्ट को 250 सदस्यीय संसद में 135 से 140 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि उनकी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) को करीब 105 सीटें मिलने की उम्मीद है.
बेलग्रेड की सड़कों पर जीत का जश्न मनाया गया. हजारों लोग सड़कों पर उतर आए, कारें हॉर्न बजाती रहीं और छात्र नारे लगाते नजर आए. यह चुनाव करीब दो साल से चले आ रहे छात्र प्रदर्शनों का नतीजा है. 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन पर छत गिरने से 16 लोगों की मौत के बाद भ्रष्टाचार और जवाबदेही के मुद्दे पर विरोध शुरू हुआ था. धीरे-धीरे यह एक बड़े जन आंदोलन में बदल गया. वुचिच ने सितंबर में दबाव में आकर स्नैप इलेक्शन कराने का ऐलान किया था.
मतदान प्रतिशत करीब 70 प्रतिशत रहा, जो 1992 में यूगोस्लाविया के विघटन के बाद सबसे अधिक है. स्टूडेंट लिस्ट में 250 उम्मीदवार हैं, जिनमें विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, अभिनेता और किसान शामिल हैं. इसका नेतृत्व कार्डियोलॉजिस्ट इलिया स्रदानोविच कर रहे हैं.
आंदोलन भ्रष्टाचार खत्म करने, कानून के शासन को मजबूत करने और शिक्षा सुधार का वादा कर रहा है. यूरोपीय नेताओं ने भी जीत पर बधाई दी है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सर्बिया के साथ काम करने की बात कही है. अब नए प्रशासन के सामने वादों को पूरा करने की बड़ी चुनौती है.