रियाद: सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों नजरुल इस्लाम अब्दुल बशीर और स्वीटी अख्तर को मक्का में कथित अनैतिक कृत्य के आरोप में फांसी दिए जाने के एक हफ्ते बाद सोशल मीडिया पर एक नई साजिश भरी कहानी तेजी से फैल रही है. लगभग एक जैसी पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि एक भारतीय युवक ने दोनों को फिल्माया और वीडियो वायरल कर उनकी मौत का कारण बना. लेकिन ये दावे पूरी तरह असत्यापित हैं और मुख्य रूप से पाकिस्तानी खातों से शुरू होकर बांग्लादेश तथा अन्य देशों तक कॉपी-पेस्ट हो रहे हैं.
सऊदी अधिकारियों के अनुसार दोनों को मक्का की मस्जिद में अनैतिक हरकत का दोषी ठहराया गया था और ताजीर के तहत मौत की सजा दी गई. न तो परिवारों को और न ही बांग्लादेश सरकार को फांसी से पहले कोई सूचना दी गई. दोनों परिवारों और ढाका को खबर मीडिया और सोशल मीडिया से ही मिली. बांग्लादेश सरकार अब सऊदी से मामले की पूरी जानकारी मांग रही है. सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी बहुत सीमित है.
एक गोपनीय मेमो के अनुसार नजरुल को अगस्त 2023 में साइबरक्राइम कानून के तहत और स्वीटी को व्यभिचार के आरोप में हिरासत में लिया गया था. दोनों परिवार इन आरोपों से इनकार करते हैं. नजरुल के परिजनों का कहना है कि उन्हें एक पाकिस्तानी सहकर्मी की साजिश का शिकार बनाया गया, जबकि स्वीटी के परिवार ने अलग कहानी बताई. दोनों पक्षों का दावा है कि नजरुल और स्वीटी एक-दूसरे को जानते भी नहीं थे.
इस अनिश्चितता का फायदा उठाकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अफवाहें फैल रही हैं. एक तरफ दावे हैं कि दोनों सिर्फ माथे पर चुंबन ले रहे थे, तो दूसरी तरफ 20 अक्टूबर से पाकिस्तानी अकाउंट्स से शुरू हुई पोस्ट्स में विस्तार से एक अलग कहानी गढ़ी जा रही है. इनमें कहा गया है कि दोनों मस्जिद अल-हरम में क्लीनर थे, उनके बीच संबंध बने, उन्होंने गेट 85-87 के बीच एक सुनसान कमरे में व्यभिचार किया, नजरुल ने एक भारतीय दोस्त को पहरे पर बिठाया, वह दोस्त वीडियो बनाकर बाद में वायरल कर दिया क्योंकि वह खुद स्वीटी से संबंध नहीं बना सका.
इन पोस्ट्स के मुताबिक भारतीय युवक को 20 साल की सजा हुई जबकि बांग्लादेशी जोड़े को मौत की सजा दी गई क्योंकि उन्होंने मस्जिद की पवित्रता भंग की. ये दावे किसी आधिकारिक रिकॉर्ड या स्वतंत्र स्रोत से पुष्ट नहीं हैं. न तो सऊदी सरकार ने भारतीय युवक की कोई भूमिका बताई है और न ही 20 साल की सजा का कोई प्रमाण मिला है. पोस्ट्स मूल रूप से पाकिस्तान स्थित अकाउंट्स से आईं, जिनमें एक PML-N युवा विंग के रियाद अध्यक्ष से जुड़े नाम भी शामिल हैं. फिर ये शब्द-शब्द बांग्लादेश, नाइजीरिया और अफगानिस्तान जैसे देशों के अकाउंट्स पर दोहराई जाने लगीं.
कुछ अल्पज्ञात वेबसाइट्स ने भी इसे अंदर की कहानी बताकर छाप दिया. विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी की गोपनीयता और बांग्लादेश की ओर से समय पर हस्तक्षेप न होने से अफवाहों का बाजार गर्म हो गया है. सवाल यह है कि रियाद ने ढाका को पहले क्यों नहीं बताया और ढाका, जो कैदियों की सूची से इन दोनों के बारे में जानता था, ने क्यों पहले कूटनीतिक प्रयास नहीं किए? अभी असली जरूरत आधिकारिक तथ्यों की है, न कि सोशल मीडिया पर फैल रहे unverified आरोपों और प्रोपेगैंडा की. बांग्लादेश सरकार सऊदी से जवाब मांग रही है.