ढाका/रियाद: सऊदी अरब में मक्का की एक मस्जिद में कथित ‘अश्लील कृत्य’ करने के आरोप में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मृत्युदंड दिए जाने के मामले ने विवाद खड़ा कर दिया है. सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के अनुसार, नजरुल इस्लाम अब्दुल बशीर और सिती अख्तर को 14 अक्टूबर 2026 को फांसी दी गई. बांग्लादेश सरकार का कहना है कि उसे इस फांसी की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी.
सऊदी प्रेस एजेंसी ने गृह मंत्रालय के हवाले से बताया कि दोनों पर मक्का की एक मस्जिद में अश्लील कृत्य करने का आरोप था. अदालत ने अपराध की गंभीरता और मस्जिद की पवित्रता के उल्लंघन को देखते हुए ‘ताज़ीर’ (विवेकाधीन सजा) के तहत मौत की सजा सुनाई. शाही आदेश के बाद सजा पर अमल किया गया. सऊदी अधिकारियों ने कथित कृत्य का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया.
बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने कहा कि सरकार और सऊदी अरब स्थित बांग्लादेश मिशन को फांसी से पहले कोई सूचना नहीं मिली. दोनों को 2023 में हिरासत में लिया गया था. ढाका ने मामले की पूरी जानकारी, अदालती फैसले की प्रति और कानूनी प्रक्रिया के बारे में जानने के लिए सऊदी राजदूत अब्दुल्लाह बिन जाफर एच. बिन अबियाह को तलब किया है.
मृत्युदंड पाए नजरुल इस्लाम का संबंध बांग्लादेश के ब्राह्मणबाड़िया जिले से बताया जाता है. परिवार के अनुसार, वे नवंबर 2022 में रोजगार के लिए सऊदी अरब गए थे और करीब छह महीने बाद हिरासत में लिए गए. उनकी मां रहीमा बेगम ने बताया कि फांसी से कुछ दिन पहले ही बेटे ने जेल से परिवार से फोन पर बात की थी. उस समय जल्द सजा दिए जाने का कोई संकेत नहीं मिला था. खबर सुनते ही परिवार में मातम छा गया. बेटे की बुआ को आघात लगा और उनकी भी मौत हो गई.
रहीमा बेगम ने अपील की है कि वे कम से कम बेटे का शव स्वदेश ला सकें. उन्होंने कहा, “तीन साल और तीन महीने से मैंने अपने बेटे का चेहरा नहीं देखा. कम से कम आखिरी बार देख सकूं.” परिवार न्याय की भी मांग कर रहा है.
बांग्लादेश सरकार सऊदी अधिकारियों से विस्तृत जानकारी मांग रही है. अदालती फैसला मिलने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी. सऊदी अरब में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक काम करते हैं.