वाशिंगटन/पेरिस: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में चल रहे हिंसक दंगों और विरोध प्रदर्शनों के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की इमिग्रेशन नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है. ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर मैक्रों ने उनकी सलाह मानी होती तो यह अशांति टाली जा सकती थी.
ट्रंप ने कहा कि पेरिस बहुत जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा और यह सौदा नहीं था. इमैनुएल को बहुत पहले अपनी सीमाएं बंद कर देनी चाहिए थीं. मैंने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा था. उन्होंने आगे कहा कि वे मेरे दोस्त हैं. मैंने उन्हें बहुत पहले चेतावनी दी थी कि फ्रांस में आप बड़ी गलती कर रहे हैं. आप पूरी दुनिया के लोगों को आने दे रहे हैं. पूरी दुनिया आ रही थी. और जैसा आप जानते हैं, पेरिस जल्द ही मुस्लिम शहर बनने वाला है. यह सौदा नहीं था.
ट्रंप के इन बयानों के बीच फ्रांस में सप्ताहांत की हिंसा के बाद कई शहरों में स्थानीय कर्फ्यू और सार्वजनिक जमावड़े पर पाबंदियां लगाई गई हैं. पेरिस, लिल, नीस समेत अन्य शहरों में अशांति फैली हुई है. इस हिंसा में करीब 2,400 लोग गिरफ्तार हुए और लगभग 1,000 पुलिसकर्मी घायल हुए. एक प्रदर्शनकारी की हृदय गति रुकने से मौत हो गई.
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकॉर्नु ने कहा, ''व्यवस्था बहाल करने का मेरा संकल्प पूर्ण है.'' सरकार ने पूरे पेरिस में व्यापक कर्फ्यू के बजाय लक्षित प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. पेरिस पुलिस ने सोमवार रात 8 बजे से कुछ क्षेत्रों में प्रदर्शनों पर रोक लगाई और प्लेस दे ला रिपब्लिक व ले हालेस इलाके में रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लागू किया.
व्यापार संघों के अनुसार, सप्ताहांत की हिंसा में करीब 3,000 दुकानें प्रभावित हुईं. राष्ट्रपति मैक्रों ने टेलीविजन संबोधन में हिंसा की निंदा करते हुए कहा, ''कुछ भी इसे जायज नहीं ठहराता, कुछ भी इसकी व्याख्या नहीं करता, कुछ भी इसे माफ नहीं करता.'' उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की मांगों को हिंसा से अलग रखने की अपील की. अगले राष्ट्रपति चुनाव से पहले सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक गुस्से को लेकर फ्रांसीसी सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है.