नई दिल्ली: पाकिस्तान ने तुर्की, कतर और इंडोनेशिया के साथ बद्र’ नामक रक्षा सहयोग समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं. दोहा में हुए इस समझौते का मकसद रक्षा उत्पादन, सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना, तकनीक साझा करना और शोध-विकास में सहयोग बढ़ाना है.
यह समझौता मक्का रक्षा समझौते के कुछ महीनों बाद हुआ है. मक्का समझौता सामूहिक रक्षा पर आधारित है, जबकि बद्र समझौता मुख्य रूप से औद्योगिक और तकनीकी सहयोग पर केंद्रित है. इसमें संयुक्त रक्षा निर्माण, प्रशिक्षण और आरएंडडी पर जोर दिया गया है.
भारत के लिए दो प्रमुख चिंताएं
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि बद्र समझौता सैन्य गठबंधन नहीं, बल्कि वर्क-शेयर समझौता है. ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने कहा कि इंडोनेशिया के साथ हुए समझौतों में सख्त डेटा प्रोटेक्शन और बौद्धिक संपदा क्लॉज हैं. ब्रह्मोस और अस्त्र की तकनीक हमारे दुश्मनों के हाथों में जाने का कोई सवाल ही नहीं है.
ग्रुप कैप्टन अजय अहलावत (रिटायर्ड) ने भी कहा कि यह एमओयू सैन्य गठबंधन के बराबर नहीं है और भारत को इस पर नजर रखने की जरूरत है, लेकिन चिंता करने की नहीं. बहरहाल, यह समझौता खाड़ी से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया तक रक्षा सहयोग के नए नेटवर्क की संभावनाएं जगाता है. इसका वास्तविक असर कितना होगा, यह आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा.