नई दिल्ली: छात्रों के NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. चीफ जस्टिस एस. कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सोमवार को मौखिक रूप से कहा, "केवल आंदोलन हो रहा है, इसलिए लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता."
SC की सख्त टिप्पणियां
कोर्ट ने कहा कि हर नागरिक की सुरक्षा जरूरी है. अगर पुलिस की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग हुआ है तो उसे रोका जाना चाहिए. CJI सूर्या कांत ने आगे कहा, "लोकतंत्र में स्व-अनुशासन जरूरी है. युवाओं को अपनी बात कहने का मौका मिलना चाहिए, लेकिन असामाजिक तत्वों को इसका फायदा नहीं उठाना चाहिए." न्यायमूर्ति जोयमाला बागची ने कहा कि पुलिसकर्मियों पर हमला भी चिंता का विषय है. कोर्ट ने राज्यों से पूछा है कि पुलिस के लिए पर्याप्त SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) क्यों नहीं हैं.
याचिकाओं पर सुनवाई कल
दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनकारियों पर कथित अत्यधिक बल प्रयोग (लाठीचार्ज, पेलेट गन) को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट कल (28 जुलाई) को सुनवाई करेगा. एक याचिका छात्रों की है, जिनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान उन पर हमला किया गया. वहीं पुलिसकर्मियों की ओर से भी याचिका दायर की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने उन पर हमला किया.
बिहार के सिवान में AK-47 से फायरिंग का मामला भी कोर्ट के समक्ष उठाया गया. यह टिप्पणी हाल के छात्र आंदोलन (CJP के नेतृत्व में) के दौरान दिल्ली के जंतर मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद आई है, जिसमें पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगे थे. सुप्रीम कोर्ट का यह बयान प्रदर्शनकारियों और पुलिस दोनों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने पर जोर देता है.