रामपुर ; समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ी राहत मिली है. मुरादाबाद मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह की अदालत ने रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि अंतिम फैसला विस्तृत सुनवाई और रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही सुनाया जाएगा. तब तक विश्वविद्यालय परिसर में कोई ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं होगी.
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी दिलचस्प बात यह है कि यही आंजनेय कुमार सिंह वह अधिकारी हैं, जिन्हें 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान रामपुर के जिलाधिकारी रहते हुए आज़म खान ने चुनावी सभा में "तंखैया" कहकर संबोधित किया था. आज़म ने समर्थकों से कहा था, ये तंखैया आदमी है, इससे डरने की जरूरत नहीं. इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था और बाद में अदालत ने उन्हें दो साल की सजा भी सुनाई.
जौहर यूनिवर्सिटी मामले में रामपुर विकास प्राधिकरण ने दावा किया था कि विश्वविद्यालय के 40 में से 38 भवन बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए हैं. उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत इन भवनों को गिराने का आदेश जारी किया गया था. विश्वविद्यालय प्रबंधन और जौहर ट्रस्ट ने इस आदेश को मंडलायुक्त न्यायालय में चुनौती दी थी.
सोमवार को हुई सुनवाई में मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय की अपील स्वीकार करते हुए ध्वस्तीकरण पर अंतरिम रोक लगा दी. उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
यानी राजनीति और प्रशासन के लंबे टकराव के बीच अब वही अधिकारी, जिन्हें कभी आज़म खान ने "तंखैया" कहा था, उनकी जौहर यूनिवर्सिटी को फिलहाल कानूनी राहत देने वाले आदेश के केंद्र में हैं. अंतिम फैसला अब अगली सुनवाई के बाद आएगा.