लखनऊ : उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के कुंडा में वर्ष 2013 में हुए चर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में कुंडा विधायक और पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को बड़ी कानूनी राहत मिली है. लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने दोबारा जांच के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की ओर से दाखिल फाइनल रिपोर्ट यानी क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है. अदालत ने राजा भैया के खिलाफ आगे कार्रवाई की मांग भी खारिज कर दी.
यह मामला 2 मार्च 2013 का है. प्रतापगढ़ के बलीपुर गांव मेंय प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद मौके पर पहुंचे तत्कालीन सीओ जियाउल हक की भीड़ ने हत्या कर दी थी. इस घटना ने पूरे प्रदेश की राजनीति को हिला दिया था. घटना के अगले दिन जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने एफआईआर दर्ज कराते हुए राजा भैया समेत कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे. इसके बाद मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस से हटाकर CBI को सौंप दी गई थी.
CBI ने शुरुआती जांच के बाद राजा भैया के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन परवीन आजाद ने इसका विरोध किया. मामला अदालतों से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. सितंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने राजा भैया की कथित भूमिका की जांच CBI से कराने का निर्देश दिया था, इसके बाद एजेंसी ने मामले की दोबारा जांच की.
दोबारा जांच में CBI ने राजा भैया के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात कहते हुए फिर फाइनल रिपोर्ट दाखिल की. 19 सितंबर 2026 को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा सिंह की अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड, दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद CBI की रिपोर्ट स्वीकार कर ली. साथ ही परवीन आजाद की ओर से आगे कार्रवाई की मांग वाली आपत्ति को भी खारिज कर दिया गया.
हालांकि, जियाउल हक हत्याकांड के मुख्य मुकदमे में अन्य आरोपियों के खिलाफ चली कार्रवाई अलग कानूनी प्रक्रिया रही है. राजा भैया को मिली यह राहत विशेष रूप से उनकी कथित भूमिका से जुड़े मामले में सीबीआई की दोबारा जांच की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार किए जाने से संबंधित है.