नई दिल्ली : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने करियर के शुरुआती दिनों का एक ऐसा किस्सा सुनाया, जब एक खुफिया मिशन के बाद उन्हें लगा था कि उनका करियर खत्म हो गया. डोभाल के मुताबिक, यह घटना उस समय की है जब वह करीब 20 साल की उम्र में सिक्किम में खुफिया जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उस दौर में सिक्किम भारत में शामिल होने की प्रक्रिया में था और सीमा क्षेत्र में चीन की गतिविधियों पर नजर रखना उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा था.
डोभाल ने बताया कि उन्होंने अपनी एक टीम को भारत-चीन सीमा के पास एक मिशन पर भेजा था. टीम को कुछ दिनों में लौटना था, लेकिन कई दिन गुजरने के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला. शुरुआत में किसी प्राकृतिक आपदा जैसी आशंका थी, लेकिन बाद में जानकारी मिली कि टीम चीनी सेना की हिरासत में पहुंच गई है. डोभाल के अनुसार, टीम के सदस्यों से पूछताछ की गई और बाद में उन्हें वापस छोड़ दिया गया. जब वे लौटे तो उनकी हालत काफी खराब थी.
इस घटना के बाद जांच शुरू हुई. डोभाल ने बताया कि उस समय उन्हें लगा कि अब उनका करियर खत्म हो गया है. हालांकि, जांच में सामने आया कि मिशन में इस्तेमाल किए गए नक्शों और स्केच में गलतियां थीं. इसलिए उन्हें सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं माना गया.
इसी मुश्किल दौर में उनके एक पुराने तिब्बती शेरपा साथी ने उन्हें जिंदगी को देखने का नया नजरिया दिया. शेरपा ने ‘मैप रीडिंग’ का उदाहरण देते हुए कहा कि जिंदगी में तीन बातें स्पष्ट होनी चाहिए. आप अभी कहां खड़े हैं, आपको जाना कहां है और वहां पहुंचने का रास्ता क्या है.
डोभाल ने छात्रों से कहा कि जिंदगी में मुश्किल और निराशा के दौर आ सकते हैं, लेकिन ऐसे समय में स्थिति को समझकर आगे का रास्ता तय करना जरूरी है.