तमिलनाडु के मंत्री का श्री राम को लेकर विवादित बयान, ‘अस्तित्व’ पर उठाए सवाल, BJP ने साधा निशाना

Global Bharat 03 Aug 2024 03:26: PM 2 Mins
तमिलनाडु के मंत्री का श्री राम को लेकर विवादित बयान, ‘अस्तित्व’ पर उठाए सवाल, BJP ने साधा निशाना

तमिलनाडु के परिवहन मंत्री और डीएमके नेता एसएस शिवशंकर ने भगवान राम के बारे में एक बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने दावा किया है कि भगवान राम के अस्तित्व को साबित करने के लिए कोई ऐतिहासिक सबूत नहीं है. अरियालुर में चोल सम्राट राजेंद्र चोल की जयंती समारोह में बोलते हुए, शिवशंकर ने कहा कि हमें अपने महान शासक राजेंद्र चोल की जयंती मनानी चाहिए, जिन्होंने हमारी भूमि को गौरवान्वित किया. हमें उनका जन्मदिन मनाना चाहिए, अन्यथा, लोग ऐसी चीज मनाने के लिए मजबूर हो सकते हैं, जिसका उनसे कोई संबंध या सबूत नहीं है.

उन्होंने आगे कहा कि यह दिखाने के लिए कि राजेंद्र चोल जीवित हैं, उनके द्वारा निर्मित तालाब हैं, उनके द्वारा निर्मित मंदिर हैं, और उनका नाम लिपियों, मूर्तियों और अन्य कलाकृतियों में उल्लेखित है. हमारे पास इसके लिए इतिहास और साक्ष्य हैं, लेकिन भगवान राम के अस्तित्व का कोई सबूत या ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं हैय वे उन्हें (राम को) अवतार कहते हैं. अवतार पैदा नहीं हो सकता. यह हमें हेरफेर करने, हमारे इतिहास को छिपाने और दूसरे इतिहास को श्रेष्ठ बताने के लिए किया जा रहा है. 2 अगस्त को अरियालुर जिले में अरियालुर जिला प्रशासन और तमिलनाडु पर्यटन विभाग द्वारा चोल सम्राट राजेंद्र चोल की जयंती मनाई गई. कार्यक्रम में परिवहन मंत्री शिवशंकर और जिला कलेक्टर रत्नस्वामी सहित सभी सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया.

भाजपा ने साधा निशाना

तमिलनाडु के परिवहन मंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने सवाल उठाया. अन्नामलाई ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "भगवान श्री राम के प्रति डीएमके का अचानक जुनून वास्तव में देखने लायक है--किसने सोचा होगा? पिछले सप्ताह ही डीएमके के कानून मंत्री थिरु रघुपति ने घोषणा की थी कि भगवान श्री राम सामाजिक न्याय के सर्वोच्च चैंपियन, धर्मनिरपेक्षता के अग्रदूत और सभी के लिए समानता की घोषणा करने वाले व्यक्ति थे.

"आज की बात करें तो घोटाले में घिरे डीएमके परिवहन मंत्री थिरु शिव शंकर ने साहसपूर्वक दावा किया है कि भगवान राम कभी अस्तित्व में नहीं थे, उन्होंने दावा किया कि यह सब चोल इतिहास को मिटाने की एक चाल है. क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है कि डीएमके नेताओं की यादें कितनी जल्दी फीकी पड़ जाती हैं? क्या वे वही लोग नहीं थे जिन्होंने नए संसद परिसर में चोल राजवंश सेंगोल स्थापित करने के लिए हमारे माननीय पीएम नरेंद्र मोदी का विरोध किया था?"

उन्होंने एक्स पर पोस्ट में आगे लिखा, "यह हास्यास्पद है कि डीएमके, जो यह सोचती है कि तमिलनाडु का इतिहास 1967 में शुरू हुआ था, को अचानक देश की समृद्ध संस्कृति और इतिहास से प्यार हो गया है. शायद अब समय आ गया है कि डीएमके के मंत्री थिरु रघुपति और थिरु शिव शंकर बैठकर बहस करें और भगवान राम पर आम सहमति पर पहुंचें. हमें पूरा विश्वास है कि थिरु शिव शंकर अपने सहयोगी से भगवान श्री राम के बारे में एक-दो बातें सीख सकते हैं. डीएमके इससे पहले भी एक बड़े विवाद के केंद्र में आ चुकी है, जब मंत्री उदयनिधि स्टाली ने एक भाषण में सनातन धर्म के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी.

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