90 दिन बाद आई हाथरस भगदड़ की पूरी कहानी, यूपी पुलिस की चार्जशीट पर क्यों भड़कीं मायावती?

Global Bharat 03 Oct 2024 03:39: PM 2 Mins
90 दिन बाद आई हाथरस भगदड़ की पूरी कहानी, यूपी पुलिस की चार्जशीट पर क्यों भड़कीं मायावती?

यूपी पुलिस ने हाथरस केस की चार्जशीट कोर्ट में जैसे ही दाखिल की, सोशल मीडिया पर हंगामा खड़ा हो गया, जो नारायण साकार हरि के आश्रम पर बुलडोजर का इंतजार कर रहे थे उन्हें बड़ा झटका लगा है. जिन्हें लग रहा था बाबा ही इस घटना का असली गुनाहगार है, उनकी नींद उड़ गई, आम जनता तो आम जनता मायावती जैसी दिग्गज नेता भी चार्जशीट की रिपोर्ट देखकर हैरान रह गईं और ट्विटर पर लिख डाला...यूपी के हाथरस में 2 जुलाई को हुए सत्संग भगदड़ कांड में 121 लोगों की मौत हो गई थी. इनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल थे. यूपी पुलिस की चार्जशीट में सूरजपाल सिंह उर्फ भोले बाबा का नाम गायब है. चार्जशीट में उसका नाम नहीं होना ये जनविरोधी राजनीति है. इससे साबित है कि ऐसे लोगों को राज्य सरकार का संरक्षण है, जो सही नहीं है.

अब सवाल ये उठता है कि यूपी पुलिस की कार्रवाई तो घटना के बाद से ही तेज चल रही थी, फिर सूरजपाल ऊर्फ नारायण साकार हरि पुलिस के शिकंजे से बच कैसे गया. क्या सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट एपी सिंह के दिमाग ने सूरजपाल को सलाखों के पीछे जाने से बचा लिया, या फिर कोई सियासी डील हुई है. हालांकि अभी कई तरह की जांच जांच जारी है, पूरी तरह से नारायण साकार हरि को क्लिनचिट नहीं मिला है, लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं हैं, पर सच्चाई ये है कि जब यूपी पुलिस ने सिकंदरामऊ थाने में एफआईआर दर्ज की थी, तब भी उसमें बाबा का नाम नहीं था. इसकी विवेचना सीओ सिटी कर रहे थे, जबकि सहायक विवेचक की भूमिका में थे सदर कोतवाल विजय सिंह. एसआईटी ने करीब 150 प्रत्यक्षदर्शियों के बयान इसमें दर्ज किए थे.

जिनके बयानों और सबूतों के आधार पर जब चार्जशीट तैयार हुई तो सूरजपाल का नाम ही किसी को नहीं दिखा. हालांकि चार्जशीट में सूरजपाल का नाम भले ही पुलिस ने नहीं डाला, लेकिन सूरजपाल के सेवादारों का नाम जरूर डाला गया है. सेवादार देव प्रकाश मधुकर, मेघ सिंह, मुकेश कुमार, मंजू देवी, मंजू यादव, राम लड़ैते, उपेंद्र सिंह, संजू कुमार, राम प्रकाश शाक्य, दुर्वेश कुमार और दलवीर सिंह का नाम चार्जशीट में है. जिनमें से मंजू देवी को हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है.

लेकिन एक सवाल अब भी लोगों के दिमाग ये है कि आखिर बाबा कहां छिपा है, अगर उसका एफआईआर में नाम नहीं है, चार्जशीट में नाम नहीं है, तो फिर वो भाग क्यों रहा है, चार्जशीट में नाम न होने का मतलब तो यही लगता है कि बाबा को इस केस से क्लीनचिट मिल चुकी है. पर कब तक ये बड़ा सवाल है, क्योंकि बाबा की सीक्रेट लोकेशन की जो तस्वीर सामने आई थी, उसमें वो एक ऐसे कमरे में बैठा नजर आ रहा था, जहां मक्खियां उड़ रही थीं, कमरे की हालत तक ठीक नहीं थी. और वहीं से बैठकर ऐसा लग रहा था कि वो लिखी हुई बात पढ़ रहा हो. 

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