पहले बाहुबली के बेटे की गिरफ्तारी, अब टूटी तिवारी हाते की दीवार, क्या सच में बदला ले रहे योगी?
क्यों टूटी दीवार, किसने दिया आदेश, क्या है विरासत गलियारा, हथौड़े की तस्वीर देख सब हुए हैरान!
जब योगी ने खुद तुड़वाई थी गोरखनाथ मंदिर की दीवार, 90 फीसदी लोग इस किस्से से हैं अनजान!

...ये है गोरखपुर का तिवारी हाता, जहां कभी पूरे पूर्वांचल या यूं कहें कि पूरे यूपी के बाहुबलियों को ट्रेनिंग दी जाती थी, बाहुबलियों के गॉडफॉदर हुआ करते थे हरिशंकर तिवारी, लेकिन 17 अप्रैल को इस तिवारी हाते पर हथौड़ा चल गया, दीवार सरकारी जमीन पर बनी थी, इसलिए गिरा दी गई, पर इस एक तस्वीर ने समूचे यूपी की सियासत को 360 डिग्री बदलकर रख दिया है, ब्राह्मणवोटबैंक को साधने के लिए अखिलेश यादव ये कहने लगे हैं योगी बाबा को हाता नहीं भाता, जबकि हरिशंकर तिवारी का परिवार ये कहने लगा है ये बदले की राजनीति है, हम लड़ेंगे, पर सच्चाई क्या है, क्या वाकई योगी आदित्यनाथ हरिशंकर तिवारी से बदला ले रहे हैं, जो लोग ऐसा सोच रहे हैं, उन्हें ये तस्वीर भी देखनी चाहिए, जब गोरखनाथ मंदिर पर की दीवार को योगी आदित्यनाथ ने खुद आदेश देकर गिरवा दिया था, किस्सा शुरू होता है योगी के पहले कार्यकाल से.
जिसके बाद सोशल मीडिया पर ये ट्रेंड होने लगा यूं ही कोई योगी नहीं बन जाता, आज दूसरे कार्यकाल में योगी आदित्यनाथ ने विरासत गलियारा प्रोजेक्ट का काम शुरू करवाया है, जिसके तहत धर्मशाला से लेकर घंटाघर होते हुए पांडेय हाता तक करीब 12.50 मीटर चौड़ी सड़क बननी है, जिसके जद में तिवारी हाते की दीवार आई तो हरिशंकर तिवारी के परिवार को खुद इसे हटाने को कहा गया, पहले इन लोगों ने दीवार बचाने की कोशिश की, अधिकारियों से मुलाकात की, नेताओं तक बात पहुंची, पर चूंकि मामला सरकारी जमीन से जुड़ा था, इसलिए राहत नहीं मिली.
आखिर में हरिशंकर तिवारी के बेटे कुशल तिवारी ने खुद ही मजदूर लगाकर हाते की दीवार गिरवा दी, पर साथ में ये भी कहा, ''सरकार को आम लोगों का ख्याल रखा जाना चाहिए, इस गलियारे को लेकर हो रही तोड़फोड़ से कई व्यापारी दुखी हैं. अखिलेश यादव जी हमें भरपूर सहयोग दे रहे हैं, इसके लिए उनका शुक्रिया. जिसके बाद सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या यूपी का ब्राह्मण अब अखिलेश यादव को वोट करने जा रहा है.
कई लोग अभी से ये कहने लगे हैं कि ये सिर्फ हाते की दीवार नहीं गिरी, बल्कि योगी सरकार की नींव हिली है, यहां तक कि कुछ दिनों पहले जब हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी को ईडी ने गिरफ्तार किया था, और उनकी पत्नी पर गिरफ्तारी के बादल मंडराने लगे हैं, तब भी हरिशंकर तिवारी के दूसरे बेटे ने इसे बदले की कार्रवाई बताया था, पर ईडी ने कोर्ट में सबूत पेश किए, जहां से विनय शंकर तिवारी को करीब 700 करोड़ के बैंक फ्रॉड वाले मामले मे जेल भेज दिया गया, जो ये बताता है अगर किसी ने कोई भी गलत काम किया है, और उसके खिलाफ जांच जरूर होगी.
चाहे वो कितना भी बड़ा बाहुबली हो, वरना यूपी में एक दौर ये भी था जब हरिशंकर तिवारी के हाते में हुए फैसले लखनऊ में बैठे दिग्गज भी नहीं बदल पाते थे, सरकार चाहे किसी की भी बने, हरिशंकर तिवारी मंत्री जरूर बनते थे, सिर पर ऊनी टोपी लगाने वाले हरिशंकर अब इस दुनिया में नहीं हैं, और उनकी बनाई विरासत पर एक के बाद एक एक्शन हो रहे हैं, जो उनके विरोधियों के लिए सुकून देने वाली ख़बर होगी, पर आखिर में सवाल यही बच जाता है कि क्या यूपी के ब्राह्मणवोटबैंक को एकजुट करने में अखिलेश कामयाब हो पाएंगे.