कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती खींचतान अब खुलकर चर्चा का विषय बन चुकी है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के 50 से ज्यादा विधायक नए राजनीतिक विकल्प पर विचार कर रहे हैं. लगातार बैठकों, नाराजगी और नेताओं की अनुपस्थिति ने इस चर्चा को और हवा दे दी है.
हाल के घटनाक्रमों ने TMC नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है. पार्टी की एक अहम बैठक में बड़ी संख्या में विधायक नहीं पहुंचे, जिसके बाद अंदरूनी असंतोष की अटकलें तेज हो गईं. रिपोर्ट्स के मुताबिक कई विधायक संगठन की कार्यशैली, नेतृत्व की प्राथमिकताओं और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
इसी बीच, पार्टी पर गिरफ्तारी और कार्रवाई का दबाव भी बढ़ा है. चुनाव बाद हिंसा, विरोध प्रदर्शन और विभिन्न मामलों में टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का मुद्दा पार्टी लगातार उठा रही है. कई जिलों में नेताओं की गिरफ्तारी, पूछताछ और राजनीतिक दबाव की शिकायतों ने संगठन के भीतर बेचैनी बढ़ाई है.
नई पार्टी बनने की अटकलों को इसलिए भी बल मिला है, क्योंकि अतीत में टीएमसी के भीतर से अलग राजनीतिक मंच की बातें सामने आती रही हैं. कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से वैकल्पिक राजनीतिक रास्ते की चेतावनी तक दी थी.
दूसरी तरफ, ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल मोड में दिखाई दे रही हैं. सूत्रों का दावा है कि वे असंतुष्ट विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से लगातार संपर्क साध रही हैं ताकि किसी बड़े टूट को रोका जा सके. लेकिन पार्टी के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई, नेताओं की नाराजगी और नई पार्टी की चर्चाओं ने साफ कर दिया है कि TMC इस समय अपने सबसे कठिन राजनीतिक दौरों में से एक से गुजर रही है. आने वाले दिनों में यह असंतोष सिर्फ दबाव की राजनीति रहेगा या वाकई किसी नई पार्टी का रूप लेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं.