क्या अखिलेश यादव अवधेश प्रसाद के प्रेम में पड़कर कांग्रेस से गठबंधन तोड़ने वाले हैं, जिस अयोध्या की जीत ने इस चुनाव में अखिलेश को वर्ल्ड फेमस बना दिया है. वही अयोध्या क्या सपा औऱ कांग्रेस गठबंधन के लिए अब काल बनने वाली है. संसद में सुधांशु त्रिवेदी ने दो दिन पहले ही कहा कि प्रभु श्रीराम भी एक वक्त को नागपाश से बंध गए थे तो क्या अयोध्या की सियासत में कुछ बड़ा होने वाला है. जो ममता बनर्जी अब तक विपक्ष से दूरी बनाए हुईं थी वो अचानक से राजनाथ सिंह से फोन पर ऐसा क्या बात करती हैं कि बंगाल और दिल्ली वाली बातचीत की चर्चा सबसे ज्यादा अयोध्या में होने लगती है.
सूत्र बताते हैं कि ममता बनर्जी ने संसद में डिप्टी स्पीकर पद के लिए अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के नाम का सुझाव दिया है. लेकिन सवाल ये है कि क्या राहुल गांधी इस बात को मानेंगे. क्योंकि पहली बार नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर बैठने वाले राहुल क्या डिप्टी स्पीकर की कुर्सी पर दूसरी पार्टी के नेता को स्वीकार कर पाएंगे. कांग्रेस की ओर से डिप्टी स्पीकर पद के लिए के सुरेश को सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है.
यही स्पीकर पद की रेस में भी थे, लेकिन स्पीकर नहीं बने तो डिप्टी स्पीकर के रेस में अब इनका नाम चलने लगा. पर सवाल है कि अयोध्या की जीत को भुनाने वाले अखिलेश क्या सुरेश के नाम पर सहमत हो पाएंगे, अगर राहुल-अखिलेश के बीच इस बात पर सहमति नहीं बनी तो क्या होगा. पहले भी इंडिया गठबंधन में छोटी-छोटी बातों को लेकर बहस हुई है और नेता अलग हो गए हैं.
यहां तक कि सपा औऱ कांग्रेस भी एक बार साथ आकर अलग हो चुकी है तो क्या अब वापस से कांग्रेस और सपा के अलग होने की बारी है या फिर ममता बनर्जी ने ये सियासी शिगुफा जानबूझकर छोड़ा है ताकि विपक्ष की बुद्धि ही काम न करे और डिप्टी स्पीकर वाला भी खेल बिगड़ जाए. ममता बनर्जी खुलकर न तो बीजेपी के साथ हैं और ना ही विपक्ष के साथ. उनकी सियासत का स्टाइल सबसे अलग है. मोदी सरकार भी चाहती है कि विपक्ष के हर नेता के साथ सहमति बनाकर चला जाए ताकि संसद शांति से चले और हंगामा कम हो.
इसिलिए कांग्रेस ये चाहती है कि किसी विवाद की स्थिति में स्पीकर बीजेपी के पक्ष में अगर वोट करेंगे तो डिप्टी स्पीकर हमारा होना चाहिए. ताकि संसद में उसकी मजबूत पकड़ बनी रहे, लेकिन एनडीए ये पद भी विपक्ष को देने के मूड में नहीं है. ये भी हो सकता है कि स्पीकर के चुनाव की तरह ही डिप्टी स्पीकर वाला चुनाव भी ध्वनिमत से हो जाए और विपक्ष देखता रह जाए.
संविधान का अनुच्छेद 93 कहता है कि डिप्टी स्पीकर पद का चयन होना ही चाहिए. इसके लिए कोई समय-सीमा नहीं है. इसलिए ये कब होगा कहना मुश्किल है. पर जब भी होगा सियासी हंगामे के आसार खूब नजर आ रहे हैं. स्पीकर पद की तरह ही इस पद पर सहमति के लिए राजनाथ सिंह लगातार विपक्षी नेताओं से संपर्क कर रहे हैं.