स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़: 'नोएडा-हरियाणा' के वाहनों पर गाजियाबाद के बच्चों का भविष्य क्यों दांव पर?

Global Bharat 02 Aug 2026 05:57: PM 3 Mins
स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़: 'नोएडा-हरियाणा' के वाहनों पर गाजियाबाद के बच्चों का भविष्य क्यों दांव पर?

गाजियाबाद: क्या गाजियाबाद का परिवहन विभाग (RTO) किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? शहर के नामचीन और नामी-गिरामी शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को दरकिनार कर बेधड़क दौड़ रहीं अनधिकृत बसें और टेंपो ट्रैवलर तो यही कहानी बयां कर रहे हैं. गाजियाबाद के प्रमुख स्कूलों और महाविद्यालयों में चल रहे परिवहन वाहनों को लेकर अब एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.

सीधे आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी) की कार्यशैली पर सवाल उठते हुए पूछा जा रहा है कि आखिर दूसरे राज्यों और अन्य जिलों (हरियाणा, दिल्ली, नोएडा, बागपत) में पंजीकृत वाहन बिना वैध स्कूल परमिट के गाजियाबाद की सड़कों पर नौनिहालों को कैसे ढो रहे हैं?

कटघरे में नामी संस्थान: सूची देखकर हैरान रह जाएंगे आप

प्राप्त जानकारी और शिकायती पत्र के अनुसार, शहर के सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले संस्थानों के परिवहन संचालन पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं.

इनमें शामिल हैं...

  • DPSG, मेरठ रोड
  • दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), HRIT कैंपस
  • के.डी.पी. स्कूल, कवि नगर
  • डी.पी.एस. पब्लिक स्कूल, राजेंद्र नगर (साहिबाबाद)
  • दीवान स्कूल, मोहन नगर
  • एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, सेक्टर-6, वसुंधरा
  • सुंदरदीप विश्वविद्यालय, दसना-मसूरी
  • डीपीएस, सिद्धार्थ विहार

खास तौर पर डीपीएस सिद्धार्थ विहार में चलने वाले कई वाहनों के नंबर (जैसे- HR55 AE 3902, HR55 AD7431, HR38 V2621, DL1ZD 9517, UP16 PT4046 आदि) सार्वजनिक कर सीधे आरटीओ से पूछा गया है कि क्या इन वाहनों के पास गाजियाबाद में स्कूल बस के रूप में संचालन का वैध परमिट है?

नियमों की धज्जियां: 5 बड़े सवाल जो आरटीओ से पूछे जा रहे हैं

  • 'ऑल इंडिया परमिट' पर स्कूल बसें क्यों: कई वाहन केवल 'ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट' या सामान्य व्यावसायिक परमिट पर चल रहे हैं, जबकि स्कूल बस संचालन के लिए विशेष ट्रांसपोर्ट परमिट और सुरक्षा नियम अनिवार्य होते हैं. आरटीओ इस अनदेखी पर खामोश क्यों है?
  • कहां गायब हुआ 'स्कूल बस कलर कोड': सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार स्कूल बसों का रंग पीला और उस पर निर्धारित सुरक्षा मानक अंकित होने चाहिए. लेकिन शहर में टेंपो ट्रैवलर और बिना निर्धारित रंग-रूप वाली गाड़ियों में ठूंस-ठूंस कर बच्चों को लाया जा रहा है.
  • कागजों में फिटनेस या सड़कों पर जानलेवा गाड़ियां: आशंका जताई जा रही है कि दर्जनों वाहनों के पास वैध फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा (Insurance) और प्रदूषण प्रमाण पत्र तक नहीं हैं. अगर कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
  • दूसरे राज्यों का रजिस्ट्रेशन, गाजियाबाद में कमर्शियल खेल: हरियाणा (HR) और दिल्ली (DL) नंबर की गाड़ियां टैक्स बचाने के चक्कर में गाजियाबाद के स्कूलों से अनुबंध कर दौड़ रही हैं. इससे उत्तर प्रदेश सरकार को राजस्व का चूना तो लग ही रहा है, बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में है
  • स्कूल प्रबंधन और ठेकेदारों की 'साठगांठ': क्या निजी परिवहन संचालकों और स्कूल प्रबंधनों के बीच किसी अंदरूनी मिलीभगत के चलते आरटीओ का प्रवर्तन दल (Enforcement Wing) इन गाड़ियों पर हाथ डालने से डरता है?

जनता का गुस्सा:'बच्चों की जान से समझौता बर्दाश्त नहीं'

स्थानीय अभिभावकों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि हर साल भारी-भरकम फीस वसूलने वाले बड़े स्कूल बसों के नाम पर थर्ड-पार्टी ठेकेदारों को काम सौंपकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं. जब कोई चेकिंग अभियान चलता है, तो कुछ दिन गाड़ियां खड़ी कर दी जाती हैं और फिर वही खेल शुरू हो जाता है. एक आक्रोशित अभिभावक सवाल किया कि 'क्या परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम केवल आम गाड़ियों के चालान काटने के लिए है? नामी स्कूलों की अवैध बसों और दूसरे राज्यों की गाड़ियों पर आरटीओ का बुलडोजर या सीज की कार्रवाई कब दिखेगी?' 

अब आरटीओ गाजियाबाद पर टिकीं निगाहें

16 जुलाई को आधिकारिक रूप से आरटीओ कार्यालय गाजियाबाद को भेजे गए शिकायत पत्र के बाद अब गेंद परिवहन विभाग के पाले में है. मांग की गई है कि, इन सभी 8 प्रमुख शिक्षण संस्थानों के बेड़े में शामिल एक-एक वाहन की गहन भौतिक व कागजी जांच (Special Drive) की जाए. बिना स्कूल परमिट, बिना फिटनेस या दूसरे राज्यों की अवैध रूप से चल रही गाड़ियों को तत्काल प्रभाव से सीज (Seize) किया जाए. दोषियों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की सख्त धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हो. आरटीओ गाजियाबाद से सीधे सवाल है, क्या आप किसी हादसे का इंतजार करेंगे या इन स्कूलों की गाड़ियों पर चलाएंगे चाबुक?

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