नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिला है। रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कड़े अमेरिकी कानूनों के तहत प्रस्तावित दंडात्मक प्रतिबंधों और भारी-भरकम शुल्कों से भारत और चीन जैसे देशों को छूट दे दी गई है। इस फैसले के साथ ही भारत पर मंडरा रहा 100 प्रतिशत का भारी आयात शुल्क (Tariff) टल गया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार विश्लेषक इसे अमेरिका का बड़ा कूटनीतिक यूटर्न मान रहे हैं, जिससे भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को नई गति मिली है।
भारत की शर्तों पर आगे बढ़ने की उम्मीद
टैरिफ वापस लेने और छूट देने के फैसले से यह साफ संकेत मिला है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते में भारत अपने राष्ट्रीय हितों और घरेलू अर्थव्यवस्था की सुरक्षा को लेकर किसी दबाव में नहीं आएगा। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पहले ही स्पष्ट किया है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की पहली खेप (First Tranche) को अंतिम रूप दिया जा चुका है और उसका कानूनी मसौदा तैयार किया जा रहा है। सरकार का रुख स्पष्ट है कि यह समझौता तभी लागू किया जाएगा जब भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले स्पष्ट लाभ हासिल होगा।
द्विपक्षीय समझौते में भारत की प्रमुख रणनीतिक शर्तें:
कृषि और डेयरी क्षेत्र की पूरी सुरक्षा: भारत ने वॉशिंगटन को दो टूक कह दिया है कि देश के संवेदनशील कृषि और डेयरी बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए अंधाधुंध नहीं खोला जाएगा।
जीएम फसलों और पोल्ट्री पर जीरो रियायत: जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों, अमेरिकी पोल्ट्री, डेयरी, गेहूं, चावल, चीनी और सोयाबीन पर आयात शुल्क में कोई रियायत नहीं दी जाएगी, जिससे भारतीय किसानों के हितों पर आंच न आए।
ग्लोबल मार्केट में बराबर या बेहतर पहुंच: भारत की मांग है कि कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, हस्तशिल्प और ऑटो पार्ट्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में वियतनाम, बांग्लादेश या पाकिस्तान के मुकाबले कम या समान शुल्क दरों पर पहुंच मिले।
स्थिर टैरिफ ढांचा: बार-बार टैरिफ नीति बदलने के बजाय एक दीर्घकालिक, पारदर्शी और अनुमानित शुल्क संरचना की कानूनी गारंटी।
गैर-टैरिफ बाधाओं (Non-Tariff Barriers) का खात्मा: भारतीय झींगा (सी-फूड), फल, मसाले और जेनेरिक दवाओं को मनमाने गुणवत्ता नियमों के तहत रोकने की प्रवृत्ति पर रोक और अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (US FDA) की प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना।
हाई-टेक निवेश और तकनीकी ट्रांसफर: अमेरिका से सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर और असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश और तकनीकी सहयोग का आदान-प्रदान।
ऊर्जा सुरक्षा: अमेरिकी तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई चेन से भारत को रियायती और निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित कराना।