इस्लामाबाद: पाकिस्तान सरकार ने मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) के दो मशहूर पारसी डॉक्टरों को देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘निशान-ए-इम्तियाज’ से मरणोपरांत सम्मानित करने का ऐलान किया है. ये डॉक्टर हैं—फिजिशियन डॉ. जल रतनजी पटेल और रेडियोलॉजिस्ट डॉ. जल ढाबों-कू.
दोनों को यह सम्मान पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की गंभीर टीबी बीमारी को पूरी तरह गोपनीय रखने के लिए दिया जा रहा है. पाकिस्तान के संघीय मंत्री और पुरस्कार समिति के अध्यक्ष अहसन इकबाल ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी. यह सम्मान मार्च 2027 में आयोजित समारोह में प्रदान किया जाएगा.
अहसन इकबाल के अनुसार, दोनों डॉक्टरों ने अपने पेशे की शपथ का पूरी निष्ठा से पालन किया और इतिहास के नाजुक मोड़ पर जिन्ना की बीमारी को सार्वजनिक नहीं होने दिया. उनकी इस गोपनीयता के कारण ही वे परिस्थितियां बनीं, जिनसे पाकिस्तान का निर्माण संभव हो सका.
साल 1946 में जिन्ना की तबीयत बिगड़ने पर इन दोनों डॉक्टरों ने उनके फेफड़ों का एक्स-रे किया था. जांच में पता चला कि जिन्ना टीबी के एडवांस स्टेज में थे और उनके पास जीने के लिए सिर्फ एक-दो साल बचे थे. उस समय टीबी का प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं था. इस राज को सिर्फ जिन्ना की बहन फातिमा जिन्ना और ये दो डॉक्टर ही जानते थे.
किताब ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ में इस घटना का जिक्र है. अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने बाद में स्वीकार किया था कि अगर उन्हें जिन्ना की बीमारी के बारे में पता होता तो स्वतंत्रता का फैसला कुछ महीनों के लिए टाल देते और शायद पाकिस्तान कभी अस्तित्व में ही नहीं आता.