वाराणसी में दीपावली के पावन अवसर पर गंगा-जमुनी तहजीब का खूबसूरत नजारा देखने को मिला. लमही स्थित सुभाष भवन में सैकड़ों मुस्लिम महिलाओं ने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्रीराम और माता जानकी की आरती उतारी. महिलाओं ने सजावटी थालियों में दीप जलाए, उर्दू में लिखी श्रीराम आरती गाई और हनुमान चालीसा का पाठ भी किया.
क्या कहा मुस्लिम महिलाओं ने?
मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी ने कहा, ''भारत के भूखंड पर रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति आज चाहे जिस धर्म को मानता हो, सबके पूर्वज भगवान श्रीराम ही हैं. धर्म तो बदलते रहे, लेकिन पूर्वज कैसे बदलेंगे? हम अपने पूर्वजों की परंपराओं से अलग होकर कभी अपनी पहचान नहीं खोना चाहते.''
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग अरबी, तुर्की या ईरानी बनने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी न अरब में, न तुर्की में और न भारत में स्वीकार्यता होगी. इसलिए अपनी असली पहचान और संस्कृति के साथ जीना चाहिए. डॉ. नजमा परवीन ने कहा कि रामराज्य की कल्पना दुनिया का हर देश करता है. घर-घर राम की चर्चा हो तो परिवार सुखी और समृद्ध बनेगा.
सामाजिक समरसता का संदेश
इस अनूठे आयोजन के जरिए मुस्लिम महिलाओं ने राष्ट्रीय संस्कृति, परंपराओं और देश की मूल भावना को सभी को साथ लेकर चलने का संदेश दिया. उन्होंने प्रभु श्रीराम को मानवता, शांति और भारतीय जीवन-मूल्यों का प्रतीक बताते हुए सामाजिक समरसता और एकजुटता का आह्वान किया.
यह कार्यक्रम मुस्लिम महिला फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित किया गया. महिलाओं ने कहा कि प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने पर जिस तरह अयोध्या सजी होगी, ठीक उसी तरह उन्होंने भी दीप जलाकर आरती उतारी.