लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बीजेपी के अंदर सीटों के बंटवारे को लेकर मंथन तेज हो गया है. 403 विधानसभा सीटों वाले यूपी में बीजेपी इस बार 2022 के मुकाबले कम सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. हालांकि, 75 से 80 सीटें सहयोगी दलों को देने का फॉर्मूला अभी संभावित है, अंतिम फैसला नहीं हुआ है. हालिया बैठकों में एनडीए के सहयोगियों ने भी सीट बंटवारे और जमीनी तालमेल को लेकर अपनी मांगें रखी हैं.
2022 में बीजेपी ने 255 सीटें जीती थीं, जबकि उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने 12 और निषाद पार्टी ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी. बीजेपी ने उस चुनाव में 376 सीटों पर चुनाव लड़ा था.
अब 2027 के लिए गठबंधन का दायरा बढ़ा है. बीजेपी के साथ अपना दल (एस) और निषाद पार्टी के अलावा जयंत चौधरी की आरएलडी और ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा भी एनडीए में हैं. ऐसे में सीट बंटवारे में चारों सहयोगियों को जगह देने की चुनौती है.
संभावित फॉर्मूले के मुताबिक अपना दल को करीब 25, आरएलडी को 20, सुभासपा को 15 और निषाद पार्टी को करीब 15 सीटें दी जा सकती हैं. यानी कुल 75 सीटों के आसपास सहयोगियों के खाते में जा सकती हैं. यह संख्या बढ़कर 80 तक भी पहुंच सकती है.
बीजेपी की रणनीति फिलहाल अपनी मजबूत सीटों को बचाने और कमजोर सीटों पर गठबंधन के सहयोगियों की ताकत का इस्तेमाल करने की बताई जा रही है. पार्टी के 2022 के प्रदर्शन को आधार बनाकर सीटों को ए, बी और C श्रेणियों में बांटने की चर्चा है, जो सीटें बीजेपी के लिए कमजोर मानी जा रही हैं. उनमें सहयोगियों को उतारकर सामाजिक समीकरण मजबूत करने की रणनीति हो सकती है.
खास तौर पर पश्चिमी यूपी में आरएलडी, पूर्वांचल में सुभासपा और निषाद बहुल क्षेत्रों में निषाद पार्टी को फायदा पहुंचाने वाले सीटों पर फोकस किया जा सकता है. हालांकि, सीटों का अंतिम बंटवारा चुनाव से पहले होने वाली बातचीत और जमीनी सर्वे के बाद ही तय होगा.