UP Election 2027 : रामपुर में चुनावी माहौल गर्म हो चुका है. सपा के शासनकाल में यहां पर आजम खान का दबदबा था, लेकिन आज बदलाव हो चुका है. यह हम नहीं बल्कि रामपुर की जनता का कहना है. 2027 से पहले यहीं जनता निर्णायक भूमिका में रहेगी. रामपुर के श्री राम चौक प्रसिद्ध है.
शाम ढलते ही चहल-पहल बढ़ने लगी थी. ज्वाला नगर के चौड़े और साफ-सुथरे बाजार में दुकानों की लाइटें जगमगा रही थीं. सोनू देर रात तक बिना किसी भय के अपनी पानी-पूरी का ठेला लगा रहा था. कुछ साल पहले तक इस समय सड़कें सुनसान हो जाती थीं और राहगीरों के मन में गुंडागर्दी, लूटपाट और वसूली का खौफ बना रहता था, लेकिन अब रात के बारह बजे भी चौराहे पर तैनात पुलिस जवानों की मौजूदगी में आम लोग सुकून की सांस ले रहे थे.
चौराहे के पास बैठे डॉ. राधेश्याम पुरानी यादों में खोए हुए थे. उन्होंने कहा कि एक दौर वह भी था जब पूरे रामपुर की पहचान केवल एक बाहुबली नेता के दबदबे और खौफ से होती थी. जमीनों पर कब्जे, गरीबों के मकान तुड़वाने और सत्ता के गुरूर का ऐसा असर था कि आम नागरिक खुलकर सांस भी नहीं ले पाता था, लेकिन वक्त का पहिया घूमा और अन्याय का वह गढ़ धीरे-धीरे ढह गया.
खुद को शहर का मालिक समझने वाले वही नेता आज अपने कर्मों की सजा जेल की सलाखों के पीछे काट रहे थे.
बाजार से गुजरती हुई बीना जैसी आम महिलाएं मुस्कुराते हुए सुरक्षित अपने घर लौट रही थीं. उन्हें अब सड़कों पर मनचलों या अपराधियों का डर नहीं सताता. स्थानीय व्यापारी और खोमचे वाले भी यही मानते हैं कि अब रामपुर में किसी बाहुबली की नहीं, बल्कि कानून और योगी सरकार का राज है.
बुजुर्गों का मानना था कि जब शासन में कड़ा अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो जनता खुद-ब-खुद खुद को महफूज महसूस करने लगती है. रामपुर अब राजनीतिक वर्चस्व और डर के काले साये से बाहर निकलकर विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव की नई भोर की ओर कदम बढ़ा चुका था. श्री राम चौक पर जलती रोशनियां इस बदलाव की गवाह थीं कि अत्याचार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा न्याय और शांति की ही होती है..