हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में सूबे में मिली हार के बाद, भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव किया है. प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार रात सभी मंत्रियों की बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने राज्य के 75 में से 73 जिलों के प्रभारी और मंत्रियों को बदल दिया है. इस बदलाव का मुख्य कारण लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन और आने वाले उपचुनाव को बताए जा रहे हैं. उत्तरप्रदेश के 75 जिलों में से सिर्फ पीलीभीत और मिर्जापुर ये बदलाव नहीं हुआ है. पीलीभीत के प्रभारी मंत्री बलदेव औलख और मिर्जापुर के प्रभारी मंत्री नंद गोपाल नंदी अपनी जगह पर बने रहेंगे.
आपको बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की जिम्मेदारी अब जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को सौंपी गई है. इसके साथ ही अमेठी की जिम्मेदारी भी उनके पास रहेगी. अयोध्या और लखनऊ देखरेख कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही करेंगे. वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के क्षेत्र मैनपुरी की जिम्मेदारी राज्य शिक्षा मंत्री संदीप सिंह को दी गई है. गोरखपुर, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अपना क्षेत्र है, उसकी जिम्मेदारी अब संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना को दी गई है.
मंत्री सुरेश खन्ना को अंबेडकर नगर की भी जिम्मेदारी दी गई है. कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को अब दो-दो जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है. ओपी राजभर को देवरिया और भदोही जिले की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि दारा सिंह चौहान को बलिया और फतेहपुर की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में सभी मंत्रियों और दोनों उप मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ संगठन महासचिव धर्मपाल सिंह और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भी मौजूद थे. मुख्यमंत्री योगी ने इस दौरान राज्य में होने वाले उपचुनाव की तैयारियों का भी जायजा लिया. हालांकि इस बदलाव का भाजपा को क्या फायदा मिलेगा यह वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि लोकसभा में चुनाव में मिली हार की वजह से उत्तर प्रदेश में पार्टी फूंक-फूंक कर नजर रख रही है.