यूपी में लॉन्च हुआ डिजिटल बुलडोजर, खतरे में लाखों शिक्षकों की नौकरी!

Global Bharat 13 Jul 2024 12:35: PM 2 Mins
यूपी में लॉन्च हुआ डिजिटल बुलडोजर, खतरे में लाखों शिक्षकों की नौकरी!

अभिषेक चतुर्वेदी

उत्तर प्रदेश में डिजिटल अटेंडेंस को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया, जिसके बाद प्रदेशभर में विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले. कई राजनीतिक पार्टियो ने इसके विरोध में बयान दिए हैं. इस बीच राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी शिक्षक इस डिजिटलाइजेशन का विरोध करेगा, उस पर सीधा एक्शन होने वाला है. 4 दिनों की लापरवाही के बाद योगी सरकार ने 4 बड़े आदेश जारी किए हैं.

आदेश नंबर 1- जो भी शिक्षक डिजिटल हाजिरी नहीं लगाएगा, उसका वेतन रोका जाएगा
आदेश नंबर 2- शिक्षक के खिलाफ विभागीय एक्शन होगा, नौकरी पर गाज गिर सकती है
आदेश नंबर 3- उन्नाव-बाराबंकी के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सैलरी रोकने के आदेश दिए
आदेश नंबर 4- एक भी मिनट लेट हुए तो दिनभर की सैलरी नहीं मिलेगी

शिक्षकों का सबसे बड़ा विरोध इसी बात को लेकर है. वो कह रहे हैं कि बारिश और बाढ़ में अगर दो मिनट भी देरी हुई तो क्या करेंगे. कुछ शिक्षक तो ये भी कह रहे हैं कि हमें एंड्रॉयड फोन ही नहीं चलाना आता है. हम प्रेऱणा ऐप पर अटेंडेंस कैसे लगाएंगे. नया ऐप सीख नहीं पाएंगे, कुछ ऐसी ही दलील उन्नाव के एक शिक्षक भी दे रहे थे.

जब ये बात डीएम साहब तक पहुंची तो उन्होंने शिक्षक का फोन चेक किया और पता चला कि मास्टरजी को कैंडी क्रैश से लेकर व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम तक सबकुछ चलाना आता है लेकिन वो डिजिटल हाजिरी से बचना चाहते हैं, ऐसे में ये लोग कौन हैं, ये समझना बेहद जरूरी है.

डिजिटल हाजिरी का विरोध करने वाले लोग बदलाव से डरने वाले औऱ सियासत करने वाले लोग हैं. योगी सरकार में मंत्री जयंत चौधरी कहते हैं कि इससे शिक्षा के क्षेत्र में सुधार होगा, जबकि अखिलेश यादव की पार्टी के नेता कह रहे हैं कि ये शिक्षकों को परेशान करने वाला फैसला है. कभी टीचर्स को मिड डे मिल में फंसा दिया जाता है, तो कभी चुनावी ड्यूटी में, टीचर्स क्या-क्या करेगा.

अब ये डिजिटल हाजिरी वाली बात ठीक नहीं है. लेकिन ऐसे लोगों को ये सोचना चाहिए कि जिनके लड़के/लड़कियां सरकारी स्कूल में हैं. क्या उन्हें इस बात का हक नहीं है कि शिक्षक टाइम पर आए और बढ़िया पढ़ाएं. सियासत के चक्कर में पहले ही इस देश की शिक्षा व्यवस्था का बेड़ा गर्क हो चुका है.

बिहार में 10वीं की परीक्षा में जब तक अंग्रेजी की पढ़ाई जरूरी थी, दसवीं पास करना मुश्किल था, लेकिन शिक्षा व्यवस्था बेहतर थी. लेकिन जब कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा से अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्म कर दी. उसके बाद बिहार की शिक्षा व्यवस्था ऐसी खराब हुई कि दसवीं पास करने वाला लड़का दो लाइन अंग्रेजी बोलना छोड़िए, ठीक से पढ़ भी नहीं जाता औऱ बाहर जाकर पिछड़ जाता है.

आज भी वहां के कई स्कूलों में शिक्षक समय पर नहीं पहुंचते. केके पाठक जैसे धाकड़ अधिकारी ने जब ये सिस्टम शुरू किया कि शिक्षकों को हर हाल में टाइम पर पहुंचना होगा तो वहां भी विरोध हुआ. अब यूपी सरकार डिजिटल अटेंडेंस का सिस्टम लेकर आई है तो विरोध जारी है. धरने पर बैठे शिक्षक कह रहे हैं कि सरकार हमें इसमें रियायत दे.

क्या है शिक्षकों की मांगें

  • इमरजेंसी की स्थिति में हमें डिजिटल अटेंडेंस से छूट दी जाए
  • चार दिन की देरी होने पर एक दिन की सैलरी काटी जाए
  • हाफ CL की व्यवस्था होनी चाहिए, ऐप 24 घंटे खुला रहे

मतलब शिक्षक अपनी सहूलियत चाहते हैं जबकि सरकार चाहती है कि सही समय पर शिक्षक स्कूल पहुंचे औऱ सरकारी स्कूलों की बदनामी दूर हो, वहां पढ़ाई-लिखाई की शानदार व्यवस्था हो. 

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