RSS कार्यकर्ताओं पर किसने बरसाए पत्थर, कौन है शमीम, जिसने योगी को किया चैलेंज, गुस्से में भागवत!

Global Bharat 31 Jul 2024 03:41: PM 3 Mins
RSS कार्यकर्ताओं पर किसने बरसाए पत्थर, कौन है शमीम, जिसने योगी को किया चैलेंज, गुस्से में भागवत!

अभिषेक चतुर्वेदी

जब RSS प्रमुख मोहन भागवत मुरादाबाद में बैठे थे, तब मुरादाबाद से 350 किलोमीटर लखनऊ में RSS कार्यकर्ताओं डरे-सहमे बैठे थे. उन्हें शाखा लगाने से रोका जा रहा था, शमीम और उसके गुर्गे साफ-साफ कह रहे थे यहां आरएसएस की शाखा नहीं लगने देंगे. जहां जाना है जाओ, जिससे शिकायत करनी है कर लो, हम देख लेंगे. हालत ये हो गई कि आरएसएस कार्यकर्ताओं को थाने जाकर शिकायत करनी पड़ी और उसके बाद जो खुलासा हुआ, वो हैरान करने वाला था, जबकि शाखा जिस जगह पर लगी थी वो न तो किसी शमीम की थी और ना ही किसी जमील की, वो जगह एक मंदिर परिसर था, लेकिन मंदिर परिसर में भी कुछ लोग दबंगई करने पहुंच गए.

चूंकि शाखा में ज्यादा शोर भी नहीं होता, इसलिए आरएसएस कार्यकर्ताओं के दिमाग में ये सवाल बना हुआ था कि हमें रोकने की वजह क्या है. इस ख़बर को सुनने के बाद हर सनातनी ये सोचकर दंग है कि सीएम योगी के राज में जब बड़े-बड़े माफिया अंदर हो गए ये नया शमीम कौन पैदा हो गया.  जो चिनहट थाना क्षेत्र के छोहरिया माता मंदिर में जाता है, वहां शाखा लगाकर बैठे आरएसएस कार्यकर्ताओं को कहता है, उठो भागो, उसके साथ 8-10 लोग और होते हैं. बात इतनी बढ़ जाती है कि दोनों तरफ से लोग एक दूसरे पर हाथ उठाने लगते हैं. आखिर में पुलिस शमीम को गिरफ्तार करती है.

घटना को लेकर छोहरिया माता मंदिर के महंत एक इंटरव्यू में बताते हैं. यहां मंदिर परिसर में 15-20 सालों से आरएसएस की शाखा लग रही है, लेकिन कभी दिक्कत नहीं हुई, किसी ने कुछ नहीं कहा, पर कुछ साल पहले इस इलाके में एक जमील नाम का आदमी रहने आया, जो खुद को रिटायर्ड दारोगा बताता है, उसी के आने के बाद से पूरा माहौल खराब हुआ है.

अब ये जमाल कौन है, क्या करता है, रिटायर्ड होने के बाद इस तरह की हरकतों में उसका नाम क्यों आ रहा है, क्या इस कहानी का कोई और एंगल भी है, इसकी जांच पुलिस को करनी चाहिए. लेकिन ये पहली बार नहीं है, जब यूपी में इस तरह की घटनाएं हुई है, बल्कि इससे पहले बिजनौर में एक सब इंस्पेक्टर अरुणा राणा को आरएसएस कार्यकर्ता से विवाद के बाद इस्तीफा तक देना पड़ा था.

कर्नाटक से लेकर केरल तक आरएसएस कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग घटनाओं की कई तस्वीरें बराबर सामने आती हैं, पर बीजेपी शासित राज्यों में जब इस तरह की घटनाएं होती हैं, तो कई तरह के सवाल खड़े होते हैं, खुद आरएसएस कार्यकर्ता भी कहते हैं कि क्या हम इन राज्यों में भी सुरक्षित नहीं हैं, जिस दिन लखनऊ में ये घटना हुई, उसके अगले ही दिन मुंबई के धारावी में एक बड़ी घटना हुई.

अल्लू, आरिफ, शुभम और शेर अली नाम के लड़कों ने अरविंद नाम के आरएसएस कार्यकर्ता को निशाना बनाया, उसके बाद जब सिद्धेश की अंतिम यात्रा निकाली गई तो उसमें भी पथराव हुआ, जिसके बाद महाराष्ट्र में योगी की मांग उठने लगी, पर सवाल ये है कि क्या आरएसएस कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए योगी कोई कानून लगाएंगे. आरएसएस की जो शाखाएं लगती हैं, अक्सर सार्वजनिक जगहों पर लगती हैं और इस तरह की घटनाएं जब होंगी तो फिर स्थानीय कार्यकर्ताओं के दिल में सुरक्षा की भावना नहीं रहेगी.

आरएसएस को लेकर हमेशा से इस देश में विरोध और समर्थन के सुर उठते रहे हैं और इस बार सवाल तब ज्यादा उठने लगे जब मोदी सरकार ने आरएरएस पर लगा 58 साल पुराना रोक हटा दिया, अब सरकारी कर्मचारी आरएसएस की शाखाओं या कार्यक्रमों में जा सकते हैं. मोदी सरकार के इस कदम को आरएसएस की नाराजगी दूर करने के रूप में देखा गया, पर यहां सवाल नाराजगी या समर्थन का नहीं बल्कि सवाल ये है कि क्या इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार को कोई कानून लाना होगा.

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