नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में एक घटना ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी हलचल मचा दी है. यहां बजरंग दल के जिला संयोजक विनोद कुमार मौर्य पर पुलिस की ओर से कथित रूप से अमानवीय व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगा है. पीड़ित विनोद मौर्य का दावा है कि आधी रात के आसपास सलोन थाने की पुलिस उनकी घर पहुंची और उन्हें जबरन थाने ले गई.
इस दौरान उन पर थप्पड़ मारे गए, गालियां दी गईं और थाने पहुंचकर कंबल (रजाई) ओढ़ाकर जमकर पिटाई की गई. उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार के सदस्यों के साथ भी अभद्रता हुई. पुलिस की ओर से बताया गया है कि यह कार्रवाई एक पुराने गोकशी (गौहत्या) मामले में अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) को लागू करने के लिए की गई थी. विनोद मौर्य उक्त मामले में गवाह थे, लेकिन कोर्ट में बार-बार पेशी पर अनुपस्थित रहने के कारण वारंट जारी हुआ था. हालांकि, आरोप है कि वारंट तामील की प्रक्रिया में उचित कानूनी तरीका नहीं अपनाया गया.
घटना की सूचना मिलते ही बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ता आक्रोशित हो उठे. उन्होंने रायबरेली के डिग्री कॉलेज चौराहे या शहीद चौक पर धरना शुरू कर दिया और सलोन कोतवाल राघवन सिंह सहित कुछ पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग की.
प्रदर्शन को और तीव्रता तब मिली, जब योगी सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह खुद आधी रात धरना स्थल पर पहुंचे. उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए और अपर पुलिस अधीक्षक से संबंधित अधिकारियों को लाइन हाजिर करने की बात कही. दूसरे दिन धरने में सपा के बागी विधायक मनोज पांडे भी शामिल हो गए.
प्रशासन ने मामले को संभालने के लिए त्वरित कदम उठाए और चौकी इंचार्ज समेत तीन सिपाहियों को थाने से हटा दिया. लेकिन प्रदर्शनकारी इससे संतुष्ट नहीं हुए और सख्त मांग पर अड़े हैं कि जब तक कोतवाल को लाइन हाजिर या निलंबित नहीं किया जाता, धरना अनिश्चितकालीन चलेगा.
यह पूरा मामला योगी सरकार में अपनी ही पुलिस के खिलाफ मंत्री और विधायकों के सड़क पर उतरने के कारण प्रदेश की राजनीति में खासी चर्चा का विषय बना हुआ है.