लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाला चुनाव सियासी लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. 403 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल 397 विधायक हैं। ऐसे में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए करीब 40-41 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत होगी. मौजूदा संख्या बल के आधार पर बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास 289 से ज्यादा विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है, जबकि समाजवादी पार्टी के पास करीब 101 विधायक हैं. इस गणित से बीजेपी के 8 और सपा के 2 उम्मीदवारों की जीत की संभावना बनती है.
हालांकि, बीजेपी के लिए यह चुनाव सिर्फ राज्यसभा में संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है. पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की तैयारी में है. माना जा रहा है कि टिकट वितरण में जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठन में सक्रिय नेताओं को विशेष महत्व दिया जा सकता है.
पुराने चेहरों पर भरोसा या नए नेताओं को मौका?
बीजेपी के मौजूदा राज्यसभा सदस्यों में से कुछ वरिष्ठ नेताओं को दोबारा मौका मिलने की चर्चा है, इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा, पूर्व डीजीपी बृजलाल और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं. हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा.
बीएल वर्मा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड में लोध समुदाय के प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है. वहीं, बृजलाल पासी समाज से आने वाले प्रमुख बीजेपी नेताओं में हैं. नीरज शेखर का पूर्वांचल, खासकर बलिया की राजनीति में प्रभाव और राजनीतिक विरासत है.
नए चेहरों से जातीय समीकरण साधने की तैयारी
बाकी सीटों पर बीजेपी नए चेहरों को उतारकर 2027 के लिए सामाजिक समीकरण मजबूत कर सकती है. गैर-यादव ओबीसी वर्ग में कुर्मी, मौर्य और अन्य पिछड़ी जातियों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर चर्चा है. इसी तरह ब्राह्मण समाज और अलग-अलग क्षेत्रीय समूहों को भी राज्यसभा के जरिए प्रतिनिधित्व देने की कोशिश हो सकती है.
सपा के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक
समीकरण के मुकाबले बीजेपी अपने सामाजिक गठजोड़ को और मजबूत करना चाहती है. इसलिए राज्यसभा के उम्मीदवारों का चयन आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की प्राथमिकताओं का संकेत भी दे सकता है. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 सीटों के लिए 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी. नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है. 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे. मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा. इसके बाद शाम 5 बजे मतगणना शुरू होगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे.