नई दिल्ली: योगी कैबिनेट में महिला मंत्री का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें वो गाड़ी में बैठी हुई दिखती हैं, बाहर कई पुलिसकर्मी खड़े हैं, थाने के बाहर पूरा मजमा लगा है, वीडियो देखकर कोई कह रहा है मंत्री हों तो इनकी तरह तो वहीं कोई कह रहा है योगी की तरह ही इन्होंने पूरा थाना हिला डाला, पर हमने जब सच्चाई समझने की कोशिश की तो मामला कुछ और निकला. ये वीडियो रविवार 29 दिसंबर का बताया जा रहा है, जरौली के रहने वाले महेश तिवारी नाम के व्यक्ति के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की, जैसे-तैसे उसने अपने घरवालों को फोन किया, फिर बात पूर्व सांसद अनिल शुक्ला और राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला तक जा पहुंची.
अनिल शुक्ला कहते हैं... ''हमारे पीओरओ ने थानाध्यक्ष को 6 बार कॉल किया, लेकिन किसी ने रिसीव नहीं किया. सुरक्षा अधिकारी देवदत्त मिश्रा से थाना प्रभारी राजेश कुमार शर्मा को सबसे पहले शाम पांच बजकर 48 मिनट पर, फिर 5:50 बजे दो बार और इसके बाद 5:52 पर फोन करवाया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई''. इसके बाद उन्होंने 6:34 बजे और 6:57 बजे फिर फोन करवाया, लेकिन उन्होंने नहीं उठाया. आखिर में कानपुर के पुलिस कमिश्नर को जब पूर्व सांसद ने कॉल किया, तब जाकर पीआरओ से बात हुई, खुद राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला थाने पहुंचीं, और लापरवाही करने वाले पुलिस अधिकारियों की भयंकर क्लास लगा दी और कहा कि जब थाना प्रभारी मंत्री का फोन नहीं उठाते आम आदमी की क्या सुनते होंगे. जब मैं यहां आई तब एक महिला भी शिकायत लेकर पहुंची थी, लेकिन उसकी भी किसी ने नहीं सुनी. वो परेशान होकर चली गई. हमारे कार्यकर्ता को इतनी बुरी तरह से पीटा गया, लेकिन थाना प्रभारी किसी का फोन तक उठा रहे. मजबूरी में थाने आना पड़ा. इसलिये कार्रवाई जरूर होनी चाहिए.
योगी की मंत्री इतने गुस्से में थीं कि उन्होंने एडीसीपी साउथ महेश कुमार से कहा महिला सुरक्षा की बातें थाना परिसर में सिर्फ लिखी भर हैं. जिस तरह की कार्यप्रणाली पुलिस की है उससे साफ है कि सब हवा हवाई है, हालांकि कुछ लोग इस पर सवाल भी उठा रहे हैं कि एक तरफ तो योगीराज में कानून-व्यवस्था दुरुस्त होने के दावे किए जाते हैं, फिर एक बीजेपी कार्यकर्ता को ही इंसाफ क्यों नहीं मिल पाया, अब मंत्री कहां-कहां जाकर मुकदमा लिखवाएंगे, जांच में ये बात सामने आई है कि जरौली के रहने वाले महेश तिवारी के रिश्तेदार ने एक व्यक्ति से एक प्लॉट खरीदा था, जिसके बारे में बाद में जानकारी मिली कि वो प्लॉट अनुसूचित जाति के व्यक्ति की है. नतीजा उसे आनन-फानन में बेच दिया. पर मामला कोर्ट पहुंच गया, और वहां से समन आ गया. इसी बात की शिकायत जब महेश ने प्लॉट दिलवाने वाले से की तो उसने अपने गेस्ट हाउस पर बुलाकर महेश को बुरी तरह पीटा.
थाने जाने पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई. कानपुर शहर का ये मामला अब सुर्खियों में है, ऐसे में एक सवाल ये भी है कि क्या दुरुस्त कानून व्यवस्था के नाम पर पुलिस वाकई हिला-हवाली कर रही है, लोगों की एफआईआर लिखने में देरी हो रही है, अगर ऐसा है तो फिर उन अधिकारियों की शिकायत कीजिए, कमेंट कर बताइए, ताकि आपकी शिकायत ऊपर तक पहुंचे.