नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शिक्षा को कौशल और रोजगार से जोड़ने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है. अब नए शैक्षिक सत्र 2026-27 (जो अप्रैल 2026 से शुरू होगा) से यूपी बोर्ड से संबद्ध सभी स्कूलों में कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले हर छात्र के लिए व्यावसायिक शिक्षा अनिवार्य हो जाएगी. इसका मतलब है कि छात्रों को मुख्य पढ़ाई के साथ-साथ कम से कम एक व्यावसायिक विषय (Vocational Subject) चुनना होगा.
यह बदलाव छात्रों को शुरुआती स्तर से ही प्रैक्टिकल स्किल्स सिखाने और उन्हें नौकरी के लिए तैयार करने की दिशा में उठाया गया कदम है. कक्षा 11 में यह व्यवस्था 2029 से लागू होगी. इसके परिणामस्वरूप 2030 की इंटरमीडिएट परीक्षा में आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस स्ट्रीम के छात्रों को 5 की बजाय 6 विषय देने होंगे, जबकि एग्रीकल्चर स्ट्रीम में 7 विषय होंगे. इसमें व्यावसायिक विषय को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा. परिषद ने शुरुआत में आईटी/आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स, एपेरल, ब्यूटी एंड वेलनेस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दे दिया है.
ये पाठ्यक्रम जॉब-रोल आधारित हैं, जिसमें उद्योग की वर्तमान मांग, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और कम से कम 10 दिनों की इंटर्नशिप पर विशेष जोर दिया गया है. यह पूरी पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के लक्ष्यों से पूरी तरह मेल खाती है, जिसका मकसद छात्रों में आत्मनिर्भरता, व्यावहारिक ज्ञान और रोजगारपरक सोच पैदा करना है.
भविष्य में और भी कई ट्रेड्स जैसे रिटेल, ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर, फोटोग्राफी, मोबाइल रिपेयर आदि को शामिल करने की योजना है. स्कूलों को अब उद्योगों से जुड़कर छात्रों का बेहतर प्रशिक्षण सुनिश्चित करना होगा. यह फैसला उत्तर प्रदेश के लाखों छात्रों के लिए न सिर्फ शिक्षा को नया आयाम देगा, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए मजबूत भी बनाएगा.